कैसे की जाती है चना की खेती
स्थानीय जानकार सिकंदर प्रजापति ने लोकल 18 को बताया कि चना की खेती आमतौर पर गांवों में बड़े पैमाने पर की जाती है. फसल कटाई के बाद अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीनों में खेत की गहरी जुताई की जाती है. इसके बाद खेत में उर्वरक खाद डालकर चना की बुवाई की जाती है. यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है, इसलिए आदिवासी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है.
4-6 इंच पर पत्ते तोड़ने की खास तकनीक
सिकंदर प्रजापति के अनुसार, जब चना का पौधा करीब 4 से 6 इंच का हो जाता है, तब उसके पत्तों और डगाल को तोड़ लिया जाता है. इससे पौधे में ज्यादा शाखाएं निकलती हैं, जिससे बाद में फलन भी बेहतर होता है. यह पारंपरिक तकनीक पीढ़ियों से अपनाई जा रही है और इससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है.
स्वाद और सेहत दोनों का खजाना ‘चना भाजी’
तोड़े गए चना के पत्तों से स्थानीय स्तर पर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है, जिसे “चना भाजी” कहा जाता है. इसे टमाटर और मिर्च के साथ पकाकर चावल-दाल के साथ खाया जाता है. ग्रामीणों का मानना है कि चना भाजी स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद होती है.
70-80 दिन में चना फल
सिकंदर ने बताया कि पत्तियां तोड़ने के बाद निकलने वाली डगाल पर ही चना का फल आता है. बुवाई के करीब 70 से 80 दिन के भीतर फल लगना शुरू हो जाता है. हरे चने को सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है, जबकि पकने के बाद चने को सुखाकर उससे शुद्ध देसी दाल तैयार की जाती है, जिसकी मांग बाजार में काफी रहती है.
कम लागत में बेहतर उत्पादन
चना की खेती किसानों के लिए किफायती साबित हो रही है. एक एकड़ खेत में करीब 20 किलो बीज की जरूरत होती है. यदि फसल अच्छी हो और कीट प्रकोप न लगे, तो एक एकड़ से 2 से 3 क्विंटल तक उपज मिल जाती है. खेती की लागत कम होने के कारण किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है.
कीट प्रकोप से बचाव जरूरी
चना की फसल में कीट लगने की संभावना बनी रहती है. इससे बचाव के लिए किसान समय-समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं. सही देखभाल और समय पर उपचार से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.
चना की खेती से दोहरा फायदा
कुल मिलाकर चना की खेती किसानों को दोहरी आमदनी का अवसर देती है. वे एक ओर चना भाजी बेचकर रोज़ाना आय अर्जित करते हैं, वहीं दूसरी ओर बीज या दाल बनाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. यही वजह है कि सरगुजा, जशपुर सहित आदिवासी अंचलों में चना की खेती किसानों की आर्थिक मजबूती की पहचान बनती जा रही है.
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