अभियान को और भी प्रेरणादायक बनाता है यह तथ्य कि दो यात्रियों में से एक तिब्बती युवक बैसाखी के सहारे मोटरबाइक चला रहा है और रास्ते में लोगों से भारत-तिब्बत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की अपील कर रहा है. यह पहल देशभक्ति, साहस और निःस्वार्थ समर्पण का जीवंत उदाहरण है.
दलाई लामा के 90वें जन्मवर्ष पर ‘करुणा वर्ष’
देहरादून के तेंजिन ने लोकल 18 को बताया कि इस वर्ष परम पूज्य श्री दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में पूरे विश्व में “करुणा वर्ष” मनाया जा रहा है. इसी कड़ी में 90 दिनों की यह रिले यात्रा शुरू की गई, जो धर्मशाला से प्रारंभ होकर दिल्ली में समाप्त होगी.
दिगिलिंग भी मैनपाट की तरह तिब्बती सेटलमेंट
लोकल 18 से बातचीत में तेंजिन ने बताया कि दिगिलिंग एक तिब्बतियन सेटलमेंट कॉलोनी है, ठीक उसी तरह जैसे छत्तीसगढ़ का मैनपाट, जहां बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय निवास करता है. उन्होंने कहा कि यह यात्रा तिब्बत से जुड़े अहम मुद्दों को आम जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है.
21 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों से गुजरेगी यात्रा
यह रिले यात्रा देश के 21 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजर रही है. अब तक तेंजिन 11 राज्यों की यात्रा पूरी कर चुके हैं।. उन्होंने बताया कि उन्हें हर जगह आम लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है. तेंजिन ने बताया कि चीन द्वारा तिब्बत में तिब्बती संस्कृति और भाषा को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है. छोटे-छोटे बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर चीन भेजा जा रहा है, जहां उन्हें चीनी भाषा और लिपि सिखाई जाती है ताकि तिब्बती भाषा उनके मन से मिट जाए.
भिक्षुओं और शिक्षकों पर अत्याचार
तेंजिन ने कहा कि तिब्बत के बड़े-बड़े मठों से कम उम्र के भिक्षुओं को जबरन ले जाया जा रहा है. वहीं तिब्बती भाषा सिखाने वाले गुरुओं को प्रताड़ित कर जेलों में डाला जा रहा है और उन पर गंभीर अत्याचार किए जा रहे हैं.
भारत के समर्थन को बताया बेहद जरूरी
तेंजिन ने कहा कि तिब्बत के मुद्दे पर भारत और भारतवासियों का समर्थन अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने भारत सरकार से भी अपील की कि वह तिब्बत के विषय में गंभीरता से विचार करे. तेंजिन ने कहा कि चीन भारत को भी नुकसान पहुंचाने वाले कार्य कर रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए गए बड़े-बड़े बांधों के कारण असम में बाढ़ की स्थिति बनती है. इसके अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा भी पहले की तुलना में अब महंगी और जटिल हो गई है.
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