झारखंडी भौजी के नाम से हैं मशहूर
सुषमा देवी आज एक जानी-मानी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं. वह अपने कंटेंट के जरिए लोगों को झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती, स्थानीय कला, संस्कृति, बाजार और खानपान से रूबरू कराती हैं. यही वजह है कि लोग उनके कंटेंट से सहजता से जुड़ जाते हैं. सोशल मीडिया पर उन्हें झारखंडी भौजी के नाम से भी जाना जाता है.
सुषमा देवी ने लोकल 18 से बताया कि वह मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले की रहने वाली हैं. वह फिलहाल अपने 2 बच्चों के साथ रांची में रहती हैं. उनके पति भारतीय सेना में कार्यरत हैं. उनके दोनों बच्चे 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं. सुषमा बताती हैं कि जब बच्चे अपनी जिम्मेदारी खुद संभालने लायक हो गए, तब उनके पास समय बचने लगा. इसी दौरान यूट्यूब के माध्यम से उन्हें पता चला कि सोशल मीडिया पर भी अच्छा और स्थायी करियर बनाया जा सकता है.
सोशल मीडिया पर हैं लाखों फॉलोअर्स
इसके बाद उन्होंने करीब 40 साल की उम्र में अपना सोशल मीडिया चैनल शुरू किया और नियमित रूप से वीडियो बनाकर अपलोड करने लगीं. शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया. आज उनके अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलाकर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं. यह सफर उनकी मेहनत, आत्मविश्वास का परिणाम है.
बेटा निभाता है कैमरामैन की भूमिका
उनके काम में उनके बच्चे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. खासकर उनका बेटा, जो दूर-दराज के इलाकों में शूट किए जाने वाले वीडियो में कैमरामैन की भूमिका निभाता है. मां-बेटे की इस जोड़ी को देखकर अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि दोनों आपस में मां-बेटे नहीं हैं. आपसी तालमेल और समझदारी के कारण उनका कंटेंट और भी बेहतर तरीके से तैयार हो पाता है.
पहले लोग मारते थे ताने
सुषमा देवी बताती हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें समाज के ताने भी सुनने पड़े. लोग कहते थे कि अब एक आर्मी वाली बीवी सोशल मीडिया में फेमस होने चली हैं, लेकिन उन्होंने इन तानों को नकारात्मक रूप से नहीं लिया, बल्कि शाबाशी के रूप में स्वीकार किया. उन्होंने अपने काम के जरिए धीरे-धीरे सभी को जवाब दिया.
आज सुषमा देवी सोशल मीडिया के माध्यम से हर महीने हजारों रुपये की कमाई कर रही हैं. वह इस आय से न केवल बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं, बल्कि उनके निजी जरूरतों में भी सहयोग कर रही हैं. सुषमा देवी की यह कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं.
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