Mini Thar Electric Car: शेख नवाब ने बताया कि कुछ महीने पहले यूट्यूब पर जुगाड़ से बनी गाड़ियों का वीडियो देखा था. फिर तीन महीने की लगातार मेहनत के बाद कबाड़ और वेस्ट लोहे की मदद से मिनी थार को तैयार किया है. यह महज तीन बैट्रियों से चलती है. साथ ही चार लोगों को बिठाकर दमदार माइलेज भी देती है. चार लोगों के बैठने की व्यवस्था के साथ यह थार छोटे रास्तों और ग्रामीण इलाकों में आसानी से चल सकती है. शेख नवाब नवीं कक्षा तक पढ़ाई की है.
यूट्यूब पर देख लगाया जुगाड़, फिर किया तैयार
शेख नवाब बताते हैं कि उन्होंने कुछ महीने पहले यूट्यूब पर जुगाड़ से बनी गाड़ियों के वीडियो देखे थे. वहीं से उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न वह भी कुछ नया और अलग बनाने की कोशिश करें. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह अपने दम पर एक थार जैसी दिखने वाली गाड़ी तैयार करेंगे. करीब तीन महीने की लगातार मेहनत के बाद शेख नवाब ने कबाड़ और वेस्ट लोहे की मदद से इस मिनी थार को तैयार कर लिया. इस गाड़ी को बनाने में करीब एक लाख रुपये की लागत आई. उन्होंने पुराने लोहे के ढांचे, बेकार पड़े पार्ट्स और अपने गैरेज में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया. यही वजह है कि यह थार न सिर्फ देखने में आकर्षक है, बल्कि पूरी तरह से चलने लायक भी है.
तीन बैटरियां में दमदार रेंज, फीचर्स देख महिंद्रा भी बोलेंगे वाह
इस मिनी थार में तीन बैटरियां लगाई गई हैं. जो इसे दमदार रेंज देती हैं. गाड़ी में डिजिटल मीटर बोर्ड लगाया गया है. जिससे स्पीड और बैटरी की जानकारी मिलती है. इसके अलावा इसमें स्टीयरिंग, गियर और ब्रेक जैसी सभी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं. चार लोगों के बैठने की व्यवस्था के साथ यह थार छोटे रास्तों और ग्रामीण इलाकों में आसानी से चल सकती है. शेख नवाब बताते हैं कि उन्होंने नवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. लेकिन पिछले कई सालों से वे बैटरी ई-रिक्शा की मरम्मत का काम कर रहे हैं. इसी काम के दौरान उन्हें बैटरियों, मोटर और इलेक्ट्रिक सिस्टम की अच्छी समझ हो गई. यही अनुभव इस मिनी थार को बनाने में उनके बहुत काम आया. वे कहते हैं कि अगर सही मार्गदर्शन और थोड़ा सहयोग मिले. तो वे इससे भी बेहतर और बड़े मॉडल तैयार कर सकते हैं.
आज शेख नवाब की बनाई यह मिनी थार इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग इसे देखने दूर-दूर से आ रहे हैं और हैरानी जता रहे हैं कि इतने कम संसाधनों में इतनी शानदार गाड़ी कैसे तैयार की गई. कई लोग इसे चलाकर भी देख चुके हैं. इसकी मजबूती व डिजाइन की तारीफ कर रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक जुगाड़ से बनी गाड़ी की नहीं है, बल्कि बिहार के युवाओं के उस जज्बे की है. जो कठिन हालात में भी कुछ नया कर दिखाने का हौसला रखते हैं.
शेख नवाब जैसे युवा यह साबित करते हैं कि हुनर किसी डिग्री का मोहताज नहीं होता. सही सोच, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो कबाड़ भी कामयाबी का रास्ता बन सकता है. इसलिए कहा जाता है कि बिहार के युवाओं में वह कर दिखाने का हुनर मौजूद है. जिसकी गूंज समय-समय पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश और विदेश तक सुनाई देती है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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