गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने पेंडीमेथालीन 30% EC के छिड़काव की सलाह दी है. बुवाई के 24 घंटे के भीतर 1.25 लीटर दवा को पानी में घोलकर छिड़कने से शुरुआती खरपतवार नष्ट हो जाते हैं. नमी वाले खेत में सही स्प्रे तकनीक अपनाने से उत्पादन में 30-40% तक की वृद्धि संभव है.
खरपतवार उत्पादन का सबसे बड़ा दुश्मन
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि गेहूं की खेती में खरपतवार एक गंभीर समस्या है. यह फसल के साथ पोषक तत्व, पानी और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करता है. शुरुआती 30–40 दिन गेहूं की फसल के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं. अगर इस दौरान खरपतवार पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पैदावार में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.
प्री-इमर्जेंस दवा का महत्व
उन्होंने कहा कि खरपतवार नियंत्रण के लिए प्री-इमर्जेंस (बुवाई के तुरंत बाद) दवा का प्रयोग बेहद जरूरी है. यह दवा खरपतवार के अंकुरण को रोकती है और गेहूं की फसल को शुरुआती बढ़त देती है. प्री-इमर्जेंस दवा का सही समय और सही तरीका अपनाने से खेत लंबे समय तक साफ रहता है.
पेंडीमेथालीन 30% EC: सही मात्रा और तरीका
गेहूं की खेती में पेंडीमेथालीन 30% EC एक प्रभावी खरपतवार नाशी दवा है. इसकी अनुशंसित मात्रा 1 से 1.25 लीटर प्रति एकड़ है. इस दवा को बुवाई के 24 घंटे के अंदर 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करना चाहिए. ध्यान रहे कि खेत में पर्याप्त नमी हो, क्योंकि सूखी मिट्टी में दवा का असर कम हो जाता है.
स्प्रे करते समय जरूरी सावधानियां
स्प्रे करते समय किसान को हमेशा पीछे की ओर चलना चाहिए, ताकि दवा की परत टूटे नहीं और समान रूप से खेत में बनी रहे. ज्यादा पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे दवा नीचे बैठ जाती है, जड़ों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और खरपतवार नियंत्रण भी कमजोर हो जाता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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