बचपन में कचरा चुना, लोगों के घरों में बर्तन धोया, अब होटल का कैफेटेरिया संभाल रहीं तीन बेटियाँ
जिनका बचपन सड़क पर कचरा चुनने और दूसरों के घरों में चौका-बर्तन करने में बीता, वैसी तीन बेटियाँ अब पटना के होटल ताज में जॉब कर रही हैं। 18 साल की सीमा, राधिका और मरियम कैफेटेरिया को संभाल रही हैं। तीनों 12वीं की छात्रा हैं और बेघर हैं। इसी साल इंटर की परीक्षा देंगी। अब उनकी जिंदगी बदल गई है। केक, पेस्ट्रीज और अन्य खाद्य सामग्री बनाती हैं। तीनों ने बोधगया से दो महीने का होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। कहती हैं- होटल मैनेजमेंट में सबसे ऊँचे पोस्ट पर जाना चाहती हूँ। इसके लिए उच्च शिक्षा हासिल करूँगी। काम नहीं करने पर पीटते थे मालिक 18 वर्षीय मरियम कहती है- पिता की मौत 12 साल पहले हो गई। सात साल की उम्र में ही माँ ने दूसरों के घरों में काम के लिए रख दिया और खुद कहीं और चली गई। मालिक और मालकिन काम नहीं करने पर पीटते थे, यातना देते थे। तंग आकर एक दिन उस घर से भाग आई और स्टेशन पर भटक रही थी। वहाँ से रैंबो फाउंडेशन पहुँची। उसकी मदद से पहली कक्षा से 10वीं तक पढ़ाई पूरी की है। सीमा कहती है- 11 साल पहले पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर कचरा चुनती थी। पिता की मौत हो गई थी। माँ के साथ कचरा चुनकर और भीख माँग कर गुजारा करती थी। पढ़ना चाहती थी, लेकिन पैसे नहीं थे। एक दिन जिला प्रशासन और विशाखा के प्रयास से राजवंशीनगर के रैंबो होम पहुँची और 10वीं की पढ़ाई पूरी की।
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