आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि लव जिहाद को दूर करने के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी है। इसी तरह युवाओं को नशे से बचाने के लिए अकेलेपन से दूर रखना होगा। समाज की जिम्मेदारी है कि वंचित और पिछड़ों को सशक्त बनाएं।
छत्तीसगढ़ दौरे के आखिरी दिन गुरुवार को आरएसएस प्रमुख राम मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल हुए। जहां विभिन्न जाति, समाज, पंथ के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में सभी लोग अपनी-अपनी आस्था और आचरण के साथ सद्भाव के कारण एक साथ रहते हैं।
घर का काम करने वाले नौकर को भी उस घर के बच्चे चाचा कहते हैं, उसे पूरा सम्मान देते हैं, यह सद्भाव कई वर्षों से चला आ रहा है। जहां सद्भावना पक्की, वहां बिगाड़ने वालों की नहीं चलेगी : मोहन भागवत ने कहा कि अपनी-अपनी विशिष्टता के साथ आगे बढ़ने की अपने यहां पूर्ण स्वतंत्रता है, दूसरे का भी सम्मान करें।
जहां सद्भावना पक्की है वहां बिगाड़ने वालों की नहीं चलेगी। तोड़ने वाली शक्तियां असफल हों इसके लिए हमें प्रयास करना है। कुछ न कुछ अपनी-अपनी चुनौतियां भी हैं। प्रत्येक समाज की आकांक्षाएं हैं। हम सब अपनी-अपनी विविधता को संभाल कर रखते आए हैं. किसी की अस्मिता समाप्त नहीं हुई. हम समाज और राष्ट्र के नाते एक हैं, उसके पीछे सामाजिक सद्भाव है।
समाज एक है, जाति पंथ उसके अंग हैं
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हमारा पूरा समाज एक है। जाति पंथ उसके अंग हैं। जिस प्रकार पूरा शरीर एक है, इसी तरह हमारी पृथक आस्था व आचरण होने के बाद भी हमारी अस्मिता एक है। हम अपनी जाति बिरादरी की उन्नति के लिए क्या कर सकते हैं। इसके बाद एक बड़ा समाज है उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैं, हम सभी जाति, पंथ बिरादरी मिलकर जिस क्षेत्र में निवास करते हैं उसकी उन्नति के लिए क्या कर सकते हैं।
यह साझा विचार करना चाहिए। हर समाज में हमारे मित्र हों, मित्र कुटुंब बनाएं। उन्होंने कहा कि घर में कुटुंब प्रबोधन करें। सप्ताह में एक दिन निश्चित करें और सब लोग एकत्र हों। भजन आदि करें और घर में बना भोजन मिलकर करें। पर्यावरण संरक्षण का विषय है। पानी बचाइए, प्लास्टिक का उपयोग कम करें, पेड़ लगाएं। घर में अपनी भाषा बोले, कोई एक भारतीय भाषा सीखें।
देश दुनिया में भ्रमण करना चाहिए लेकिन अपने आसपास कि झुग्गी में भी कभी कभार जाएं, वे भी अपने हैं। इसी तरह संविधान में प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, नागरिक कर्तव्य, नीति निर्देशक तत्व बताए गए हैं, सबको इसकी जानकारी होनी चाहिए।
हमने एकजुटता से अंग्रेजों को भगाया आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि ब्रिटिश लोग स्वेच्छा से भारत से नहीं गए, हमने अंग्रेजों को एकजुटता से भगाया। अपनी एकता और अखंडता के कुछ सूत्रों को हम भूल गए, इसलिए दृष्टि में भेद आ गया था। अंग्रेजों को हमारी एकता अच्छी नहीं लगी, इसलिए भेद पैदा किया।
भारत की रीति न मानने वाले ही करते हैं आक्रमण : डॉ. भागवत ने कहा कि भारत में आकर भी कुछ लोग भारत की रीति में नहीं रहते हैं, इसलिए वह आक्रमण करते हैं। हम चिंतित हैं लेकिन हमें और चिंतित होना चाहिए। हम सब एक दूसरे को पकड़कर चलें।
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