डीएम ने कार्यपालक पदाधिकारी से मंगलवार शाम तक 13 बिंदुओं पर जरूरी कागजात उपलब्ध कराने को कहा है।
सीवान में नगर पंचायत आंदर में 1 करोड़ 90 लाख 82 हजार 500 रुपए की योजनाओं में अनियमितता को लेकर उठे सवालों पर जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने “सिर्फ मुहर ही नहीं लगाई”, बल्कि इस मामले पर सीधे जांच का आदेश भी जारी कर दिया है।
डीएम ने कार्यपालक पदाधिकारी से मंगलवार शाम तक 13 बिंदुओं पर जरूरी कागजात उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि कथित वित्तीय गड़बड़ियों की विस्तृत जांच की जा सके।
डीएम द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी के लिए जारी किया गया लेटर।
94.50 लाख के वाटर एटीएम पर उठे सवाल नगर पंचायत आंदर में 94 लाख 50 हजार रुपये की लागत से लगाए गए 15 वाटर एटीएम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिलाधिकारी ने उपलब्ध जियो-टैग फोटो का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि तस्वीरों में वाटर एटीएम नजर ही नहीं आ रहे हैं, बल्कि केवल वाटर कूलर जैसे उपकरण दिखाई देते हैं, जबकि निविदा वाटर एटीएम की निकाली गई थी। इसी आधार पर पूरे प्रोजेक्ट की उपयोगिता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
आवश्यकता, आकलन और राजस्व पर सवाल जिलाधिकारी ने यह भी सवाल उठाया है कि वाटर एटीएम लगाने की आवश्यकता आखिर किस आधार पर तय की गई। इसका आकलन कैसे किया गया, मेंटेनेंस की क्या योजना है और इससे अपेक्षित राजस्व कितना है। साथ ही अब तक जल आपूर्ति से कितना शुल्क वसूला गया, इसकी भी स्पष्ट जानकारी मांगी गई है।
डीएम ने मांगे अहम दस्तावेज जिलाधिकारी ने कार्यपालक पदाधिकारी से 12 से अधिक प्रकार के दस्तावेज तलब किए हैं। इनमें टेंडर और बिड डॉक्यूमेंट, तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति, एलओआई, वर्क ऑर्डर, एग्रीमेंट, परफॉर्मेंस बैंक गारंटी, वाटर एटीएम की जांच-टेस्टिंग-कमिश्निंग रिपोर्ट, अधिमान्य नीति अनुपालन के प्रमाण तथा सशक्त स्थायी समिति और बोर्ड बैठकों की कार्यवाही शामिल है। इसके साथ ही नगर पंचायत में होल्डिंग धारियों की संख्या और जलापूर्ति की मौजूदा स्थिति की जानकारी भी मांगी गई है।
पार्षद की शिकायत से खुला मामला इस पूरे मामले की शुरुआत वार्ड संख्या 8 के पार्षद प्रेम कुमार की शिकायत से हुई। आवेदन में बताया गया कि नगर पंचायत द्वारा 15 वाटर एटीएम पर 94.50 लाख, साइन बोर्ड पर 43.77 लाख, जिम स्थापना पर 24.85 लाख और सेक्शन मशीन पर 27.90 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं। कुल मिलाकर लगभग 1.91 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होने की बात सामने आई है, जिस पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई गई है।
और इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की।दैनिक भास्कर की पड़ताल के बाद मामला तूल पकड़ चुका है।अब प्रशासन ने कागजों की जांच की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। मंगलवार तक मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध होते ही यह मामला अगले चरण में प्रवेश करेगा, जिससे आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
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