सीतामढ़ी का सोनापट्टी बाजार सोना–चांदी और रत्नों की ज्वेलरी के लिए सीमांचल और नेपाल सीमा तक प्रसिद्ध है, जहां पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की भरमार है.
सोनापट्टी की सबसे बड़ी खासियत है यहां के कारीगरों की निपुणता. महीन नक्काशी, बारीक कारीगरी और डिजाइनों की विस्तृत रेंज इसे खरीददारों की पहली पसंद बनाती है. स्वामी अलंकार के प्रोपराइटर मनोज कुमार के अनुसार, सोना पट्टी में वर्षों से सोना–चांदी की मंडी चलती आ रही है और यह पीढ़ियों से अपनी विरासत कायम रखे हुए है. मनोज बताते हैं कि आसपास के गांवों के अलावा नेपाल के खरीदार भी बड़ी संख्या में यहां ज्वेलरी खरीदने पहुंचते हैं. कारीगर इतने कुशल हैं कि ग्राहक चाहे जितना अनोखा डिज़ाइन लाए, वे वही पैटर्न हूबहू तैयार कर देते हैं.
नए-नए डिजाइनों की भरमार
आज ऑनलाइन युग में जब ग्राहक नेट पर डिजाइन खोज कर आते हैं, तब भी सोनी पट्टी के कारीगर पीछे नहीं रहते. मनोज बताते हैं कि रोज कई ऐसे ग्राहक आते हैं जो सोशल मीडिया या वेबसाइटों से खोजकर ज्वेलरी डिजाइन दिखाते हैं. यहां के कारीगर उन डिज़ाइनों को बिल्कुल उसी तरह उतारते हैं जैसे ग्राहक चाहता है-चाहे वह अत्याधुनिक डायमंड कट हो, पारंपरिक पान के पत्ते वाला हार हो या फिर मिथिला संस्कृति से प्रेरित खास डिजाइन. यही लचीलापन और कारीगरी इस बाजार को खास बनाती है.
परंपरा, भरोसा और बेहतरीन कारीगरी
कहा जाता है कि सोनापट्टी की पहचान 100 साल से भी अधिक पुरानी है और इस लंबे समय में यहां की दुकानों ने न सिर्फ ग्राहकों का भरोसा जीता है बल्कि इसे एक ज्वेलरी हब के रूप में विकसित भी किया है. सैकड़ों दुकानों में हर दुकान अपने आप में खास है और ग्राहक संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. यही कारण है कि सोनापट्टी आने वाले ज्यादातर खरीददार यह कहते हुए जाते हैं कि “यहां जो चाहो, वहीं मिल जाता है.” परंपरा, भरोसा और बेहतरीन कारीगरी- इन्हीं तीन आधारों पर सोनापट्टी आज भी सीतामढ़ी की शान बना हुआ है.
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