ग्रामीण इलाकों में देहाती नस्ल की गायें लंबे समय से किसानों की आजीविका और सेहत का सहारा रही हैं. ये गायें कम देखभाल में आसानी से पल जाती हैं और महंगे चारे की जरूरत नहीं होती. घास, भूसा और साधारण दाने से ही इनका पालन हो जाता है, जिससे खर्च कम रहता है. देहाती गाय का दूध पौष्टिक, हल्का और सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, जिससे घी, दही और छाछ बनाई जाती है. इनके गोबर और मूत्र से जैविक खाद व कीटनाशक तैयार होते हैं, जिससे खेती की लागत घटती और मुनाफा बढ़ता है.
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