सिंगरौली जिले में अवैध रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब उन्हें न कानून का डर है और न ही पुलिस का खौफ। ताजा घटना ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि थाने परिसर में खड़े अवैध रेत से भरे वाहन को हथियारबंद दबंगों ने बंदूक की नोंक पर छुड़ा लिया और मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने अवैध रेत परिवहन कर रहे एक वाहन को जब्त किया था। वाहन को चितरंगी थाने लाया जा रहा था। इसी दौरान एक अन्य गाड़ी से दर्जनों लोग मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि इन लोगों ने बंदूक दिखाकर वनरक्षक को धमकाया।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आरोपियों ने वनरक्षक को वाहन से कुचल देने की धमकी दी। इसके बाद दबंग जब्त किए गए अवैध रेत से भरे वाहन को छुड़ाकर फरार हो गए। यह पूरी घटना थाने परिसर में हुई और पुलिस के सामने ही वाहन ले जाया गया।
‘हथियारों का खेल’ और पुलिस की चुप्पी
बताया जा रहा है कि देर रात अचानक कुछ लोग गाड़ियों से पहुंचे और सीधे थाने परिसर में प्रवेश कर गए। हाथों में हथियार और खुलेआम धमकी इन सबके बीच वनकर्मियों से गाली-गलौज की गई। बंदूक लहराते हुए आरोपियों ने जब्त वाहन अपने कब्जे में लिया और मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं
अब उठ रहे ये सवाल?
क्या थाने में मौजूद पुलिसकर्मी असहाय थे?
क्या किसी ऊपरी दबाव के कारण कार्रवाई नहीं की गई?
क्या थाने के सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे?
क्या आरोपियों की पहचान कर ली गई है?
क्या किसी पुलिसकर्मी की मिलीभगत की आशंका है?
घटना के बाद पुलिस महकमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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रेत माफिया का बढ़ता दुस्साहस
सिंगरौली जिले में अवैध रेत उत्खनन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, लेकिन इस बार मामला सीधे कानून व्यवस्था को चुनौती देने का है। यदि थाने परिसर से ही बंदूक की नोंक पर जब्त वाहन छुड़ाया जा सकता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि रेत माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत और संगठित है। फिलहाल वनरक्षक की शिकायत पर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या आरोपियों तक कानून का हाथ पहुंच पाता है या नहीं।
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