KhatuShyam Ji Mandir Band: राजस्थान के खाटूश्याम जी मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना है. मंदिर प्रशासन ने 3 और 5 मार्च को मंदिर के पट बंद रखने का निर्णय लिया है. विशेष धार्मिक व्यवस्थाओं और आयोजन संबंधी कारणों से इन दिनों दर्शन नहीं हो सकेंगे. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा की योजना इसी अनुसार बनाएं. निर्धारित तिथि के बाद मंदिर पुनः नियमित समय पर दर्शन के लिए खोला जाएगा. विस्तृत समय-सारिणी प्रशासन द्वारा जारी की गई है.
मंदिर कमेटी के शक्ति सिंह चौहान ने बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण मंदिर के पट पूर्ण रूप से बंद रखे जाएंगे. ग्रहण काल समाप्त होने और मंदिर की आवश्यक शुद्धि के पश्चात, 4 मार्च की सुबह से श्याम भक्तों को हमेशा की तरह बाबा के सुलभ दर्शन प्राप्त हो सकेंगे. इसके बाद 4 मार्च को ही शयन आरती के बाद फिर से बाबा श्याम के कपाट श्याम प्रभू की विशेष सेवा पूजा और तिलक श्रृंगार के चलते मंदिर के पट पुनः बंद कर दिए जाएंगे.
5 मार्च विशेष सेवा पूजा होगी
शक्ति सिंह चौहान ने बताया कि 4 मार्च को रात 10 बजे बाबा श्याम का मंदिर बंद होगा. इसके बाद अगले दिन बाबा श्याम की विशेष पूजा-अर्चना और तिलक श्रृंगार किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार में करीब 6 से 8 घंटे का समय लगता है. इसलिए 5 मार्च को भी मंदिर दिनभर बंद रहेगा. विशेष पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद 5 मार्च को संध्या आरती के समय शाम 5 बजे के बाद फिर बाबा श्याम के कपाट भक्तों के लिए खोले दिए जाएंगे. पट खुलने के पश्चात श्रद्धालु बाबा के मनमोहक तिलक श्रृंगार के दर्शन कर सकेंगे और अपनी मनौतियां मांग सकेंगे.
हर महीने होता है बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार
श्री श्याम मंदिर कमेटीने सभी श्याम भक्तों से विशेष अपील की है कि वे दर्शनों की इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं. असुविधा से बचने के लिए मंदिर खुलने के तय समय पर ही बाबा श्याम के दरबार पधारें. आपको बता दें कि सीकर के खाटूश्याम जी में स्थित बाबा श्याम का मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है. रोजाना यहां लाखों की संख्या में भक्त आते हैं. वहीं, हर महीने तिलक श्रृंगार किया जाता है. इस दौरान मंदिर बंद रहता है.
जानिए कौन है बाबा श्याम
बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है. महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध में उतरने जा रहे थे, तभी भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे शीश दान मांगा. बर्बरीक ने बिना झिझक भगवान कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया. इससे प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और वे हारे हुए लोगों के सहारा बनेंगे. तभी से बाबा श्याम भक्तों के बीच हारे के सहारे के नाम से पूजे जाते हैं.
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