संतोष पचार ने सलेक्शन विधि के जरिए 4 फीट तक लंबी और एकरूप गाजर उगाने में सफलता हासिल की है. उन्होंने बताया कि इस विधि में फसल से गुणवत्ता वाले गाजर के कंदों का चयन कर बीज के लिए बुवाई की जाती है. तैयार बीज को अगले वर्ष उपयोग में लिया जाता है और यह प्रक्रिया लगातार 3 से 4 साल तक दोहराई जाती है. इसी तकनीक के सहारे संतोष पचार 20 बीघा भूमि में खेती कर हर साल 20 लाख रुपए से अधिक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं.
बेस्वाद गाजरों की समस्या का ऐसे निकाला समाधान
संतोष पचार ने बताया कि उन्हें खेती करना अच्छा लगता है. उन्होंने बताया कि शुरू में जब गाजर की खाती की तब टेढ़ी-मेढ़ी और बेस्वाद गाजरों की समस्या से जूझ रही थीं, जिससे बाजार में उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता था. इसके समाधान के लिए कई तरीके अपनाए लेकिन समाधान नहीं मिला, इसके बाद किसी के कहने पर राज्य सरकार द्वारा आयोजित कृषि मेले में गई. वहां उन्होंने विशेषज्ञों से बातचीत कर नई तकनीकों की जानकारी ली. उनको लगा कि इस तकनीक से खेती में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है और कृषि विभाग से खेती का प्रशिक्षण लिया, इसके बाद उन्होंने यह समझा कि समस्या की जड़ घटिया बीज हैं.
शहद और घी का नुस्खा अपनाया
इसके बाद उन्होंने हार न मानते हुए प्रयोग का रास्ता चुना. संतोष पचार ने शहद और घी के मिश्रण से परागण का एक अनोखा तरीका अपनाया. शुरुआत में लोगों ने इस प्रयोग पर संदेह जताया, लेकिन संतोष अपने प्रयोग पर डटी रहीं. समय के साथ नतीजे चौंकाने वाले सामने आए. गाजर का स्वाद, आकार, रंग और चमक लगातार बेहतर होती चली गई. इस नए बीज से न केवल गुणवत्ता बढ़ी, बल्कि फसल चक्र भी तेज हुआ, जिससे मुनाफा जल्दी मिलने लगा.
दो बार मिल चुका है राष्ट्रपति पुरस्कार
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