ग्रामीणों के अनुसार, पहाड़ी पर फैली विशालकाय हड्डियां, जिनकी अनुमानित लंबाई 11 से 12 मीटर तक बताई जा रही है, अब असुरक्षित स्थिति में पड़ी हुई हैं। छोटे बच्चे और चरवाहे इन हड्डियों के टुकड़ों से छेड़छाड़ कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ बच्चों द्वारा जीवाश्म के टुकड़ों को तोड़कर इधर-उधर फेंक दिए जाने की बातें भी सामने आई हैं, जिससे संभावित ऐतिहासिक साक्ष्यों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका और बढ़ गई है।
स्थानीय निवासी नारायण केवट ने बताया कि जैसे ही पहाड़ी पर विकराल आकार की हड्डियां दिखाई दीं, उन्होंने तत्काल इसकी सूचना गांव के सरपंच को दी थी, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में जब बच्चों द्वारा हड्डियों से छेड़छाड़ शुरू हुई, तब उन्होंने स्वयं पहल करते हुए बिखरे टुकड़ों को एकत्र कर एक स्थान पर रखा, ताकि इन्हें किसी तरह सुरक्षित किया जा सके। बावजूद इसके, स्थिति फिर से बिगड़ती नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने दोबारा इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसडीएम सिहावल को दी, लेकिन इसके बाद भी मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस देरी से ग्रामीणों में गहरा रोष और निराशा देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह खोज वास्तव में प्राचीन जीवों से जुड़ी है, तो यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर साबित हो सकती है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह सदा के लिए नष्ट हो सकती है।
मामले को लेकर एसडीएम सिहावल एवं पुरातत्व विभाग की प्रभारी अधिकारी प्रिया पाठक ने शनिवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम से संपर्क किया गया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



