श्रावस्ती में जिलाधिकारी अश्वनी कुमार पांडेय की अगुवाई में ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने जनपद को बाल विवाह मुक्त बनाने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, ग्राम वॉलेंटियर, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ व्यापक जन जागरूकता फैलाना था। जिलाधिकारी अश्वनी कुमार पांडेय ने कहा कि बाल विवाह केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विकास में बाधा डालने वाली गंभीर कुरीति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन श्रावस्ती को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इस दिशा में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवकों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित विभाग या प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सद्भावना समिति के अध्यक्ष योगेंद्रमणि त्रिपाठी ने ग्राम वॉलेंटियरों और थारू जनजाति की बालिकाओं का परिचय कराया। जिलाधिकारी ने संस्था द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, जनसंपर्क गतिविधियों और सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशासन और समाज के सहयोग से ही इस प्रकार की सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकथाम के प्रति संकल्प दिलाया गया। बाल क्लब के सदस्यों ने भी शपथ ग्रहण कर बाल विवाह के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने का वचन दिया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बाल विवाह मुक्त समाज की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों और सहयोगियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जनपद श्रावस्ती को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में निरंतर और संगठित प्रयास किए जाएंगे। प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज की सहभागिता से यह अभियान अब जन आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बाल विवाह के विरुद्ध यह पहल न केवल कानून के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन की मजबूत नींव भी साबित होगी।
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