दरअसल, 19 अक्तूबर 2023 की यह कहानी है. डॉक्टर राघव नरूला उस दौरान हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन के नाहन मेडिकल कॉलेज में तैनात थे. इस दौरान वह पर एक युवती का इलाज उनके पास चल रहा था. जिले के पातलियों गांव की रहने वाली 22 वर्षीय युवती की हालत काफी नाजुक थी और उसे दमा की बीमारी थी. इस बीच युवती की हालात ज्यादा गंभीर हो गई तो उसे रेफर किया गया और पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया. सबसे पहले तो गरीब युवती के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी की एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि मरीज की हालात गंभीर है और ऐसे में उसके साथ अस्पताल से कौन सा स्टाफ जाएगा.
इस दौरान पलमोनरी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर राघव ने मरीज को चंडीगढ़ तक पहुंचाने का बीड़ा उठाय़ा. गौर रहे कि प्रोटोकॉल और नियमों में यह कहीं नहीं लिखा है कि एंबुलेंस में मरीज को रेफर करने पर उच्च अस्पताल में डॉक्टर भी जाएंगे. डॉक्टर राघव की इस बात को लेकर तारीफ भी हुई थी. डॉक्टर राघव मूल रूप से सिरमौर के पावंटा साहिब के रहने वाले हैं.
अब आईजीएमसी में हुए इस पूरे विवाद को लेकर डॉक्टर राघव ने न्यूज 18 से कहा कि मरीज ने उनके साथ बदतमीजी की. वह कहते हैं कि वह रोजाना जिम जाते हैं और शूगर तक का इस्तेमाल नहीं करते हैं. उन्होंने बताया कि वह नशा नहीं करते हैं. वहीं, मारपीट का शिकार हुए शिमला के कुपवी के जुब्बल के टीचर अर्जुन पंवार ने भी डॉक्टर पर तू-तड़ाक और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं.
प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्री में मीटिंग
इस पूरे एपिसोड के बाद अस्पताल प्रबंधन से मेडिकल सुपरिंटेंडेंट राहुल राव, प्रिंसिपल, स्वास्थ्य सचिव, और स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने मीटिंग की. शाम को मीटिंग के बाद धनी ऱाम शांडिल ने कहा कि डॉक्टर का व्यवहार अच्छा नहीं था. उन्होंने माना कि डॉक्टर इस पेशे के काबिल नहीं हैं और उन्हें सस्पेंड किया गया है. मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है. अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें नौकरी से भी निकाला जा सकता है.
आईजीएमसी के प्रभारी राहुल राव ने क्या बताया
इस मामले में आईजीएमसी के प्रभारी डाक्टर राहुल राव ने बताया कि सीएम सुक्खू ने भी दिल्ली से मामले पर संज्ञान लिया है और आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है. वह कहते हैं कि पूरे मामले की जांच की जा रही है.
आज एसपी से मिलेंगे परिजन
मारपीट में मरीज अर्जुन पंवार के नाक से खून निकल आया था और वह अब अस्पताल में भर्ती हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टर को नौकरी से निकाला जाना चाहिए. वह दोबारा मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे. वही, मामले में अब परिजन अटैप्म्ट टू मर्डर की धारा लगाने की मांग को लेकर एसपी शिमला से मिलेंगे. परिजनों का कहना है कि हमला जानलेवा था. इससे पहले, परिजन आरोपी डॉक्टर के कक्ष के बाहर डटे रहे और उन्हें बाहर निकालने की मांग करते रहे. इस दौरान अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात करना पड़ा था. यहां पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की भी देखने को मिली थी.