एचपीपीसीएल के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले पर सीबीआई पिछले 8 माह से जांच कर रही है. सीबीआई जांच की दिशा, निष्कर्ष और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए अदालत ने कहा कि अब तक मृतक विमल नेगी की मौत से जुड़े ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं लाए जा सके हैं. अदालत की इन टिप्पणियों को जांच एजेंसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
अब तक नहीं मिले ठोस सबूत
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि एफआईआर में नामित अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रत्यक्ष अथवा निकट संबंध सामने नहीं आ सका है. अदालत के अनुसार, सीबीआई अब तक यह स्पष्ट करने में असफल रही है कि कथित अधिकारियों की भूमिका किस प्रकार से अपराध या आत्महत्या के लिए उकसावे से जुड़ती है. कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आधिकारिक क्षमता में बने संबंध कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत संचालित होते हैं. ऐसे में केवल प्रशासनिक या आधिकारिक संपर्कों के आधार पर किसी को आपराधिक जिम्मेदारी में नहीं घसीटा जा सकता.
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीबीआई के अधिवक्ता यह साबित करने में नाकाम रहे कि इस मामले में कथित अनुचित लाभ आत्महत्या के लिए उकसावे का कारण बन सकता है. न्यायालय ने माना कि इस दलील के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है. सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि देश राज द्वारा विमल नेगी से मांगा गया ‘स्पष्टीकरण’ कानून की दृष्टि में उकसावे की परिभाषा में नहीं आता है. केवल स्पष्टीकरण मांगना या प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठाना आत्महत्या के लिए उकसावे के समान नहीं माना जा सकता है.
सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर और भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी मृतक विमल नेगी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार कारणों से संबंधित कोई ठोस, प्रत्यक्ष और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रही है. जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया, जिससे आत्महत्या और कथित आरोपियों के बीच सीधा संबंध स्थापित हो सके. अदालत ने आगे कहा कि जिस प्रकार से जांच आगे बढ़ी है, उसे देखते हुए इस मामले में न तो जांच के सफल निष्कर्ष और न ही मुकदमे की शुरुआत की कोई उज्ज्वल संभावना दिखाई देती है.
अदालत की यह टिप्पणी सीबीआई जांच की गुणवत्ता और दिशा दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है. इस मामले में पिछले 8 महीनों से सीबीआई किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. अदालत ने हरिकेश मीणा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही कहा है कि जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें जांच में शामिल होना होगा. अदालत की अनुमति के बिना वो देश नहीं छोड़ सकते और मामले से जुड़े किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे. प्रत्येक सुनवाई पर कोर्ट में मौजूद रहना होगा.
सुनवाई के दौरान तथ्यों का होगा मूल्यांकन
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं मानी जाएंगी. कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणियां केवल वर्तमान में दाखिल आवेदनों के निपटारे के उद्देश्य से की गई हैं. न्यायालय ने यह भी साफ किया कि मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान तथ्यों और साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जाएगा. ये भी बताते चलें कि यह मामला 19 मार्च को न्यू शिमला पुलिस थाने में दर्ज हुआ था.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.