मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में संबंधित डॉक्टर का मरीज के साथ व्यवहार बिल्कुल ठीक नहीं था. उन्होंने कहा कि वह स्वयं डॉक्टरों से मिले थे और पूरे प्रकरण की दोबारा जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर हड़ताल पर चले गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों को भी अपना अहंकार छोड़ना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के डॉक्टर और मरीज दोनों ही उनके परिवार का हिस्सा हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं होती रहीं, तो आम लोगों का स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा उठ जाएगा और लोग इलाज के लिए अस्पताल आने से कतराएंगे.
डॉक्टरों ने सीएम सुक्खू से की थी मुलाकात
बता दें कि मामले को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्य शनिवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने उनके सरकारी आवास ओक ओवर पहुंचे थे. इस दौरान मुख्यमंत्री और डॉक्टरों के बीच बैठक हुई. बैठक में सरकार की ओर से मामले की दोबारा जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था.
मरीजों की बढ़ी परेशानी
उधर, प्रदेश भर में करीब 2800 से अधिक डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. कई अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं और मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. सरकार लगातार डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील कर रही है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था. इस वीडियो में एक डॉक्टर मरीज के साथ मारपीट करता हुआ नजर आया था. वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर को ड्यूटी से बर्खास्त कर दिया था.
इस कार्रवाई के बाद अन्य डॉक्टरों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और हड़ताल पर चले गए. हड़ताल पर गए डॉक्टर अपने साथी डॉक्टर की बर्खास्तगी को गलत बता रहे हैं. उनकी मांग है कि जिस डॉक्टर को ड्यूटी से हटाया गया है, उसे तुरंत बहाल किया जाए. डॉक्टरों का कहना है कि बिना पूरी जांच के की गई कार्रवाई अन्यायपूर्ण है.
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