जमुई में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शीतलहर और तेज कनकनी के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। शनिवार को भी पछुआ हवा के साथ ठंड का असर जारी रहा, जिससे दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए और ठंड में और वृद्धि हुई।
प्रशासन द्वारा चौक-चौराहों पर अलाव की व्यवस्था के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत अलग है। शहर के बाजारों और प्रमुख चौराहों पर स्थानीय लोगों और युवाओं का आरोप है कि उन्हें अलाव जलाने के लिए स्वयं लकड़ी का इंतजाम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नगर परिषद की ओर से की गई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है।


राहत व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा
स्थानीय युवाओं के अनुसार, रात के समय मजदूर, रिक्शा चालक, दुकानदार और राहगीर अलाव के सहारे ही ठंड से बचाव करते हैं। पर्याप्त लकड़ी न मिलने के कारण अलाव जलाना मुश्किल हो रहा है, जिससे जरूरतमंदों को परेशानी हो रही है। लोगों का यह भी आरोप है कि ठंड लगातार बढ़ रही है, लेकिन राहत व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।
राहत व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे
ग्रामीणों और शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ठंड की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में लकड़ी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गरीब, असहाय और राहगीरों को वास्तविक राहत मिल सके। जमुई में ठंड का प्रकोप जारी है और राहत व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
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