लुधियाना के जगरांव के सिविल अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक ही परिवार के सात लोग एक साथ जांच और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे और सभी में रेबीज (कुत्ते के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी) के संदिग्ध लक्षण पाए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बिना देरी किए सभी मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया है।
सिविल अस्पताल जगरांव की एसएमओ डॉ. गुरविंदर कौर ने बताया कि यह प्रवासी परिवार है। परिवार पिछले करीब तीन वर्षों से शेरपुरा चौक स्थित एक निजी फैक्टरी में काम कर रहा है। परिवार के सदस्यों को पहले कुत्तों ने काटा था, लेकिन उन्होंने समय रहते न तो टीका लगवाया और न ही कोई इलाज करवाया। डॉ. गुरविंदर कौर के अनुसार, मरीजों में मुंह से अत्यधिक लार निकलना, बोलने में दिक्कत, बात न समझ पाना जैसे शुरुआती लेकिन गंभीर लक्षण सामने आए, जिसके बाद सभी को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया।
सूत्रों के मुताबिक, इन सात मरीजों में पति-पत्नी, उनके तीन बच्चे और महिला की बहन के दो बच्चे शामिल हैं, जिनमें कुल पांच बच्चे हैं। सभी मरीजों को सरकारी एंबुलेंस के माध्यम से पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया गया।
हैरानी की बात है कि सिविल अस्पताल जगरांव के रजिस्टर में फिलहाल इस मामले से संबंधित कोई रिकॉर्ड या मरीजों के नाम दर्ज नहीं हैं, क्योंकि प्राथमिक जांच के तुरंत बाद ही सभी को रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, पीजीआई में होने वाले विशेष परीक्षणों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी मरीज वास्तव में रेबीज से संक्रमित हैं या नहीं। फिलहाल, सभी मरीज पीजीआई चंडीगढ़ में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में उपचाराधीन हैं। यह मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है, बल्कि कुत्तों के काटने के बाद समय पर इलाज न करवाने के खतरनाक परिणामों की गंभीर चेतावनी भी देता है।
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