पुलिस जिला नवगछिया के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत डीमहा पंचायत में सड़क और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि गंभीर रूप से घायल मरीजों को खाट पर लादकर पैदल अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ताजा मामला डीमहा पंचायत का है, जहां एक महिला छत पर चढ़ने के दौरान सीढ़ी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई।
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ग्रामीण चिकित्सक द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद उसे सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन गांव तक पक्की सड़क और एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन मरीज को खाट पर लादकर पैदल लगभग 20 किलोमीटर दूर गोपालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना पड़ा।
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<p><strong>पंचायत में पिछले 17 वर्षों से सड़क नहीं बनी</strong>
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घायल महिला की पहचान दर्शन पंडित की पत्नी अनीता देवी के रूप में हुई है। अनीता देवी के भतीजे मिथलेश ने बताया कि उनकी पंचायत में पिछले 17 वर्षों से सड़क नहीं बनी है। इसी वजह से बीमार लोगों को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गांव में न तो अस्पताल की सुविधा है, न स्कूल और न ही आवागमन के लिए पक्की सड़क। कई बार जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन गांव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों का भी इस गांव में आना-जाना नहीं होता।
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ग्रामीण मुकेश ने बताया कि वर्ष 2008 के बाद से यहां कोई सड़क नहीं बनी है, जिसके कारण कोई भी वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। खासकर रात के समय यदि कोई बीमार पड़ जाए और समय पर इलाज न मिले, तो जान जाने तक की नौबत आ जाती है। एंबुलेंस चालक भी सड़क नहीं होने का हवाला देकर गांव आने से मना कर देते हैं।
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<strong>गांव में लगभग 900 की आबादी है</strong>
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ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें मुख्यधारा से बिल्कुल अलग-थलग छोड़ दिया है। गांव में लगभग 900 की आबादी है, लेकिन आज तक गांव तक पहुंचने के लिए एक भी पक्की सड़क नहीं बन सकी है। लोगों का कहना है कि उन्होंने सुशासन के नाम पर वोट दिया, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके गांव को नजरअंदाज कर दिया।
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यह घटना एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है।
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