सीहोर जिले के आष्टा न्यायालय ने एक सनसनीखेज हत्या मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी के हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा दी है। चरित्र शंका में उपजे विवाद ने खूनी रूप ले लिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा कि संदेह के नाम पर हत्या किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
अभियोजन के अनुसार 2 जुलाई 2024 को पति-पत्नी के बीच तीखा विवाद हुआ। झगड़े की सूचना 108 एम्बुलेंस को दी गई। जब तक एम्बुलेंस कर्मी मौके पर पहुंचे, हालात बिगड़ चुके थे। सरिता सेन को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल आष्टा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अर्जुन सेन लंबे समय से अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। इसी शक को लेकर आए दिन घर में विवाद होता था। घटना वाले दिन विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने सरिता के साथ मारपीट की और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की पुष्टि हुई, जिसने पूरे मामले की सच्चाई सामने ला दी।
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पुलिस जांच में खुली परतें
पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना शुरू की। पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) 2023 की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज किया गया। साक्ष्यों के आधार पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सेशन ट्रायल क्रमांक 204/2024 में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए आरोपी के अपराध को साबित किया। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक दिनेश कुमार सोनी ने सशक्त पैरवी की। बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त माना। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार चौहान ने साफ कहा कि पत्नी के चरित्र पर संदेह हत्या का कोई औचित्य नहीं बन सकता। अदालत ने आरोपी अर्जुन सेन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 2,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
बच्चों के लिए राहत का आदेश
इस दर्दनाक घटना में सबसे ज्यादा प्रभावित मृतिका के नाबालिग बच्चे हुए। न्यायालय ने नालसा योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोषसिद्ध आरोपी का सजा वारंट तैयार कर उसे जिला जेल सीहोर भेजा जाए। चरित्र शंका, घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न जैसे मामलों में कानून अब सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। न्यायालय ने अपने फैसले से यह स्पष्ट कर दिया कि संदेह के नाम पर किसी की जान लेने वालों को कानून बख्शेगा नहीं।
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