बाड़मेर में सोमवार को एक व्यक्ति के शव लेकर उसके परिजन व कालबेलिया समाज के लोग रेन बसेरा मुख्य सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। मौके पर एडीएम, एएसपी, समेत चारों थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे की समझाइश के बाद कालबेलिया समाज के लोग मानें और
इससे पहले जोगियों की दड़ी से शव लेकर रेलवे स्टेशन की ओर लेकर आ रहे थे। महाबार सर्किल पर इस दौरान पुलिस के रोकने के दौरान आपस में धक्का-मुक्की हो गई। रेन बसेरा अंडरब्रिज के पास पुलिस ने रोक दिया। सड़क पर रखकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दरअसल, जोगियों की दड़ी निवासी वेदाराम (53) चार दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती था। कल रात को उसकी डेथ हो गई थी। सोमवार को परिजन और समाज के लोगों सरकार की ओर से अलॉट जमीन पर अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए। प्रशासन ने कहा था कि फिलहाल जमीन अलॉट नहीं हुई है। जब हो जाएगी। तब वहां पर अंतिम संस्कार कर देना। तब आप वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार कर दीजिए। इसको लेकर विवाद हो गया।
रोकने के दौरान धक्का-मुक्की
परिजन व समाज के लोग बॉडी को लेकर महाबार सर्किल से रेन बसेरा होते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ आ रहे थे। तब महाबार सर्किल पर पुलिस ने उनको रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और उनके बीच धक्का-मुक्की भी हुई है। रेन बसेरा के आगे और ऑवरब्रिज से पहले उनको रोका गया। वहां पर एसडीएम यशार्थ शेखर, एएसपी नीतेश आर्य, कोतवाल मनोज कुमार, सदर थाना करतार सिंह, रीको थाना भंवरसिंह समेत आरएएसी के जवान मौजूद रहे।
प्रशासन ने पहले हमें लॉलीपॉप दिया
नारायण नाथ कालबेलिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन के लोगों ने हमें लॉलीपॉप दे दी। जो जमीन प्रशासन ने हमें दी है। जिसके खसरा संख्या बताई है। वहां पर भूमाफिया अंतिम संस्कार नहीं करने दे रहे है। कह रहे कि हमारी खातेदारी जमीन है। इससे अच्छा तो हम बॉडी को ट्रेन में डालकर मुख्यमंत्री आवास चलें जाए। कलेक्टर हमारी सुन नहीं रहे है। एएसपी, डीएसपी समेत पुलिस प्रशासन के लोग हमें प्रशासन कर रहे है। आज हमें अंतिम संस्कार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कालबेलिया समाज के यह हाल है। प्रशासन नहीं माना तो सांप और पूगी लेकर आएंगे। तब सरकार सुनेगी। सरकार के पास कंपनियों के लिए जमीनें है लेकिन कालबेलिया के लिए जमीन नहीं है।
जमीन अलॉट का प्रोसेस चल रहा है, तब तक वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार कर सकते है
तहसीलदार हुकमीचंद का कहना है कि – जोगी समाज की व्यक्ति की निधन हो गया था। इसके लिए पटवारी को भेज दिया गया था। जिससे कोई विवाद की स्थिति नहीं बने। वन विभाग का गेट खुलवा दिया गया था। यह बॉडी जहां पर जमीन अलॉट कर रहे है। वहां पर लेकर चले गए थे। वहां पर जमीन अलॉट हुई नहीं थी। प्रोसेस में चल रहा है। उसको छोड़कर यहां वन विभाग की जमीन पर आ जाए। लेकिन यह लोग यहां पर न लाकर रेलवे स्टेशन की तरफ ले जाने लगे। तब हमने रोक इनसे समझाइश की इसके बाद यह मान गए। वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार करवाया गया है। यूआईटी प्रोसेस चल रहा है। जल्द ही अलॉट हो जाएगी। तब तक वन विभाग की जमीन पर अंतिम संस्कार के लि कोई नहीं रोकेंगा।
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