सिवई खाने के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इसे पकाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। जीबी पंत कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने मोटे अनाज से मीठी सिवई (रेडी टू ईट) बनाने में सफलता हासिल कर ली है।
वैज्ञानिकों ने पोषण से भरपूर इस सिवई का पेटेंट भी हासिल कर लिया है। साधारणतया सिवई (वर्मिसीली) मैदा या सूजी से बनती है। लेकिन मैदा पाचन में प्रतिकूल प्रभावकारी और शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक होता है।
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के खाद्य एवं पोषण विभाग में एमएससी की छात्रा विनीता खर्कवाल ने पूर्व प्राध्यापक डॉ. सरिता श्रीवास्तव के मार्गदर्शन और डॉ. एसके शर्मा के सहयोग से मोटे अनाज का प्रयोग कर इस पौष्टिक सेंवई को बनाया है। बाजार में मिलने वाली सिवई को पकाना पड़ता है। किंतु यह तैयार (रेडी टू ईट) सेंवई है।
इनको गर्म दूध में डालकर दो-तीन मिनट के अंदर ही खाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। खाने में बेहद स्वादिष्ट यह सिवई शरीर को कोई हानि भी नहीं पहुंचाती हैं। पेटेंट हासिल होने पर विवि के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी है।
शरीर के लिए है बेहद फायदेमंद
प्रचलित सिवई मैदा से बनने के कारण शरीर के लिए नुकसानदायक होती है। लेकिन यह सिवई मोटे अनाज से बनी होने के कारण शरीर के लिए लाभदायक है। इसमें प्रोटीन, खनिज, लवण और रेशे की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है।दूसरा इसे पकाने का भी कोई झंझट नहीं है।
यह सिवई कौणी (फॉक्सटेल मिलेट) से बनाई गई है। अनूठी इस सेंवई के पेटेंट के लिए मई 2018 में आवेदन शरीर के लिए फायदेमंद, रेडी टू ईट और अपने आप में किया गया था। 2019 में शोधपत्र प्रकाशित हुआ बीती 11 जनवरी को इसका पेटेंट ग्रांट हो गया है। खाद्य कंपनियां इसकी तकनीक के लिए पंतनगर विवि से संपर्क और कर सकती हैं। -डॉ. सरिता श्रीवास्तव, पूर्व प्राध्यापक खाद्य एवं पोषण विभाग, पंतनगर विवि
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