अस्पताल में भोजन सेवा
उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में सभी सेवादार अपने-अपने घरों से हर महीने चार दिन भोजन बनाकर लाते थे और शहर के अलग-अलग हिस्सों में वितरित करते थे. बाद में विचार आया कि इस सेवा को जिला अस्पताल से जोड़ा जाए, जहां मरीजों के परिजन सबसे अधिक कठिनाई में रहते हैं. इसी सोच के तहत 20 अक्टूबर 2024 से जिला अस्पताल में प्रतिदिन सुबह 9 बजे सेवा प्रारंभ की गई. तीन ओंकार के उच्चारण के बाद भोजन वितरण होता है, जहां महिलाएं और पुरुष खुद ही अलग-अलग पंक्तियों में लग जाते हैं.
प्रतिदिन 3000 रुपये का खर्च
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 120 पैकेट अस्पताल परिसर में वितरित किए जाते हैं जबकि 20 पैकेट शहर में चिह्नित असहाय परिवारों तक पहुंचाए जाते हैं. एक भोजन पैकेट में 6 पूरी, सब्जी, केला और बिस्किट शामिल होता है. इस सेवा पर प्रतिदिन लगभग 3000 रुपये का खर्च आता है, जो सभी सदस्य अपनी बचत से गुल्लक में जमा करते हैं.
संगठन ने गोद लिए 10 गांव
उन्होंने आगे कहा कि भोजन सेवा के साथ-साथ संगठन ने लगभग 10 गांव गोद लिए हैं, जहां गरीब बच्चों को नैतिक, सामाजिक और राष्ट्र शिक्षा दी जाती है. हर महीने एक दिन बाल विकास की कक्षाएं आयोजित होती हैं, जिन्हें महिला शिक्षिकाएं संचालित करती हैं. इसके अलावा स्वच्छता अभियान, वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण जैसे कार्य भी नियमित रूप से किए जाते हैं.
सतना में संगठन के 150 सदस्य
वर्तमान में सतना में संगठन के लगभग 150 सदस्य हैं, जो अपने जन्मदिन और पारिवारिक आयोजनों का खर्च भी सेवा कार्यों में लगाते हैं. भविष्य की योजना के तहत संगठन एक वैन लेने की तैयारी में है ताकि शहर और आसपास के इलाकों में और अधिक जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाया जा सके. वास्तव में ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ का यह मंत्र सतना में पिछले 25 वर्षों से साकार होता दिखाई दे रहा है.
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