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मामला तब उजागर हुआ जब मुख्य आरोपी ने अपने घर की छत पर मस्जिदनुमा गुंबद का निर्माण करवा दिया। गांव के बीच इस तरह का निर्माण देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर धारकुंडी थाना पुलिस ने मौके पर दबिश दी। तलाशी के दौरान घर से धार्मिक साहित्य, झंडे, बैनर, मोबाइल फोन और खुद की लिखी हुई एक किताब बरामद की गई, जिसका उपयोग कथित रूप से धर्मांतरण के लिए किया जा रहा था।
पुलिस जांच में पता चला कि 68 वर्षीय लालमन चौधरी ने करीब 15 साल पहले धर्म परिवर्तन कर अपना नाम अब्दुल रहमान रख लिया था। इसके बाद उसने अपने बेटे विजय भारती (32) का नाम बदलकर मोहम्मद उमर और भतीजे दीनानाथ चौधरी (42) का नाम अब्दुल्ला कर दिया। तीनों मिलकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे। यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी, लेकिन हालिया निर्माण कार्य के बाद मामला सामने आया।
बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि पिछले 12 महीनों में मुंबई से ऑनलाइन माध्यम से करीब 9 लाख रुपये आरोपियों के खातों में भेजे गए। पूछताछ में मुख्य आरोपी ने बताया कि धार्मिक यात्रा के दौरान उसकी पहचान मुंबई के एक व्यक्ति से हुई थी, जो लगातार फंडिंग कर रहा था और कई बार झखौरा गांव भी आ चुका है। पुलिस की नजर से बचने के लिए आरोपी सामान्य कॉल के बजाय केवल वॉट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क में रहते थे।
एडिशनल एसपी प्रेमलाल कुर्वे ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 व 5 और बीएनएस की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। मुंबई कनेक्शन, फंडिंग के स्रोत और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट का अंतिम उद्देश्य क्या था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
धर्मांतरण के आरोपी गिरफ्तार– फोटो : credit
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