राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत बुधवार को एक दिवसीय प्रवास के दौरान भीलवाड़ा पहुंचे। उनके आगमन पर शहर में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी रही। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने रेलवे स्टेशन से लेकर विवाह स्थल और कार्यक्रम स्थलों तक चाक-चौबंद व्यवस्था संभाली। भागवत ने हरणी महादेव रोड स्थित एक निजी रिसॉर्ट में उद्यमी सत्यप्रकाश डीडवानिया के पुत्र प्रत्युष डीडवानिया के विवाह समारोह में शिरकत की और नवविवाहित दंपती को आशीर्वाद प्रदान किया।
भीलवाड़ा संघ परिवार के प्रमुख पदाधिकारियों ने सरसंघचालक का हार्दिक अभिनंदन किया। इस दौरान प्रदेश और जिले से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक विषयों पर सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। स्थानीय पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय गतिविधियों की जानकारी भी भागवत के साथ साझा की।
शाम के समय सरसंघचालक मोहन भागवत ने भीलवाड़ा शहर के लगभग 500 कुटुंब परिवारों के साथ विशेष बैठक में भाग लिया। इस बैठक में वर्तमान समय की पारिवारिक चुनौतियों, बिखरते पारिवारिक मूल्यों, संयुक्त परिवार की अवधारणा, संस्कारों के संरक्षण और सामाजिक एकता पर विस्तृत चर्चा की गई।
भागवत ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार ही व्यक्ति की पहली पाठशाला है और यदि परिवार सुदृढ़ है तो समाज स्वतः सशक्त बनता है। उन्होंने उपस्थित परिवारों को पारस्परिक संवाद, एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता और संस्कार आधारित जीवन की प्रेरणा दी।
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इस बैठक में संघ के राजस्थान क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम, चित्तौड़ प्रांत के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में सक्रिय स्वयंसेवक मौजूद रहे। सुरक्षा प्रबंधन को देखते हुए पूरे शहर से लेकर समारोह स्थल तक पुलिस बल तैनात रहा।
भागवत के भीलवाड़ा प्रवास के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन और संत गोविंद राम ने सरसंघचालक से भेंट कर आगामी सनातन मंगल महोत्सव के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। 19 से 26 फरवरी तक हरि सेवा उदासीन सनातन मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशाल समारोह के संबंध में स्वामी हंसराम उदासीन ने विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति का अद्भुत एवं भव्य संगम प्रस्तुत करेगा। मुलाकात के दौरान आध्यात्मिक परंपराओं, सनातन संस्कृति के संरक्षण, समाज में सकारात्मक नेतृत्व और युवा पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ने जैसे मुद्दों पर सार्थक संवाद हुआ।
सनातन सेवा समिति के रवींद्र कुमार जाजू ने बताया कि इस पावन महोत्सव में तीन ब्रह्मचारी संत दीक्षा ग्रहण करेंगे, जो अपने संपूर्ण जीवन को सनातन धर्म की सेवा, तपस्या और साधना को समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि दीक्षा दान समारोह ऋषि परंपरा का महान विस्तार है और यह अवसर अत्यंत दुर्लभ एवं पुण्यकारी माना जाता है।
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