पाले से बचाव के लिए अपनाएं ये त्वरित उपाय
खुले खेतों में लगी फसलों को पाले से बचाने के लिए किसान पॉलिथीन या पुआल का उपयोग कर सकते हैं. रात के समय क्यारियों को ढक देने से तापमान संतुलित रहता है और पाले का असर कम होता है. इसके अलावा हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए बोर या टाट की टाटी लगाना भी कारगर उपाय माना गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार पाले की संभावना होने पर खेत में हल्की-हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए, इससे मिट्टी का तापमान अचानक नहीं गिरता.
सल्फर का छिड़काव लाभकारी
वहीं, सरसों, गेहूं, चावल, आलू और मटर जैसी फसलों में समय-समय पर सल्फर (गंधक) का छिड़काव लाभकारी होता है. सल्फर के छिड़काव से न केवल पाले का असर कम होता है, बल्कि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व भी मिलते हैं. दीर्घकालीन उपाय के तौर पर खेत की मेड़ों पर वायु अवरोधक पेड़ लगाने की भी सलाह दी गई है, जिससे ठंडी हवाओं का सीधा प्रभाव फसलों पर न पड़े.
पाले से घटती है पैदावार, समय पर कदम जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पाले का सबसे ज्यादा असर फसलों के फूल और फल आने की अवस्था में पड़ता है. पाले की वजह से फूल झड़ जाते हैं, जिससे पैदावार में भारी कमी आ जाती है। अगर समय रहते बचाव नहीं किया गया तो पौधों की पत्तियां, टहनियां और तना तक नष्ट हो सकता है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, मटर, चना, सरसों, आलू के साथ-साथ पपीता, आम और अमरूद जैसी बागवानी फसलों पर भी पाले का गंभीर प्रभाव पड़ता है.
आधुनिक तकनीक से बच सकती हैं फसल
वैज्ञानिकों ने बताया कि जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है, तो पौधों की कोशिकाओं के अंदर मौजूद पानी जम जाता है, जिससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और पौधों की वृद्धि रुक जाती है. यही कारण है कि किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए समय रहते आवश्यक उपाय अपनाने चाहिए. वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और थोड़ी सी सतर्कता से किसान अपनी फसलों को शीतलहर और पाले से बचाकर नुकसान को कम कर सकते हैं.
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