जिले की कंज्यूमर कोर्ट में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और पान मसाला कंपनी के खिलाफ चल रहे भ्रामक विज्ञापन के मामले में बुधवार को दोनों पक्षों की ओर से लिखित जवाब पेश किया गया। इस दौरान दोनों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखा और परिवादी की ओर से की गई मांगों का विरोध किया।
सलमान खान की तरफ से मुंबई के अधिवक्ता पराग और कंपनी की तरफ से दिल्ली के अधिवक्ता वरुण ने कोर्ट में जवाब पेश किया। दोनों ने अदालत में यह दलील दी कि यह शिकायत दुर्भाग्यपूर्ण है और प्रताड़ना के उद्देश्य से की गई है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले की अगली तारीख 26 दिसंबर तय की है।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता इंद्रमोहन सिंह हनी और रिपुदमन सिंह ने 27 नवंबर को अदालत में एक आवेदन दायर कर यह मांग की थी कि सलमान खान की ओर से पेश किए गए जवाब और वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षरों की एफएसएल जांच करवाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने अगली तारीख पर सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश जारी करने की भी मांग की थी।
सलमान खान की ओर से पेश किए गए जवाब में सभी आरोपों का खंडन किया गया है। अधिवक्ता पराग ने कहा कि प्रार्थना पत्र पर सलमान खान के असली हस्ताक्षर हैं, जो उनके पैन कार्ड और पासपोर्ट पर किए गए हस्ताक्षरों से पूरी तरह मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है।
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जवाब में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की कौन सी धारा सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के लिए बाध्य करती है। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि अदालत के पास हस्ताक्षर की तुलना या जांच के लिए आवेदन स्वीकार करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र पर आदेश के लिए 26 दिसंबर की तारीख तय कर दी है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि 3 नवंबर को कंज्यूमर कोर्ट ने बॉलीवुड स्टार सलमान खान और पान मसाला कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। परिवादी अधिवक्ता इंद्रमोहन सिंह हनी ने अदालत में याचिका दायर की थी कि कंपनी द्वारा भ्रामक विज्ञापन किया जा रहा है, जिसमें केसर युक्त इलायची का दावा किया गया है। परिवादी का कहना है कि ऐसे विज्ञापनों से जनता भ्रमित हो रही है और युवा वर्ग कैंसर जैसी हानिकारक बीमारियों की ओर बढ़ रहा है। याचिका में ऐसे भ्रामक और भड़काऊ विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
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