सर्प मित्र ने बताया कि रसेल वाइपर काट ले तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें. समय पर इलाज मिलने से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि सांप काटने के बाद मरीज स्थानीय सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां डॉक्टर जिम्मेदारी से बचने के लिए उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर कर देते हैं. इस देरी के कारण कई बार मरीज की रास्ते में ही मौत हो जाती है.
सूचना मिलते ही सर्प मित्र मौके पर पहुंचे और काफी सावधानी के साथ इस अत्यंत जहरीले सांप का रेस्क्यू किया गया. रेस्क्यू के दौरान भी आसपास के लोग सहमे रहे क्योंकि रसेल वाइपर को एशिया के सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों में गिना जाता है. सर्प मित्र आमिरनाथ गुप्ता ने बताया कि अब ठंड का मौसम धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है और हल्की धूप निकलने लगी है. इसी कारण यह सांप धूप सेंकने के लिए अपने बिल से बाहर निकल आया होगा. उन्होंने बताया कि रसेल वाइपर में हेमोटॉक्सिन नाम का अत्यंत घातक जहर पाया जाता है. यह जहर इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी एक बूंद हाथी जैसे बड़े जानवर की जान लेने के लिए भी काफी मानी जाती है. उनके अनुसार यह सांप जहां काटता है वहां का मांस बहुत तेजी से सड़ने लगता है.
आमिरनाथ गुप्ता ने लोगों को सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति को रसेल वाइपर काट ले तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है. समय पर इलाज मिलने से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि जब सांप काटने के बाद मरीज स्थानीय सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां डॉक्टर जिम्मेदारी से बचने के लिए उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर कर देते हैं. इस देरी के कारण कई बार मरीज की रास्ते में ही मौत हो जाती है.
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से अपील की कि ऐसे मामलों में लापरवाही न बरती जाए और तुरंत इलाज की व्यवस्था की जाए. उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भी इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेने की मांग की. रेस्क्यू के दौरान सर्प मित्र ने इस सांप की करीब एक इंच लंबा दांत भी दिखाया और बताया कि जहरीले सांपों में रसेल वाइपर के दांत काफी लंबे होते हैं जो सामान्य सुरक्षा दस्तानों को भी भेदने में सक्षम होते हैं. यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
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