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Sasaram Ajab Gajab News: सासाराम के सदर अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक शख्स हाथ में झोला लिए इलाज कराने पहुंचा. लेकिन उस झोले के अंदर जो था उसे देखकर डॉक्टरों के भी पसीने छूट गए. 10 फीट लंबे तीन जिंदा कोबरा के साथ अस्पताल के बेड पर लेटे इस ‘स्नेक एक्सपर्ट’ की कहानी जानकर आप भी दंग रह जाएंगे.
सासारामः बिहार के सासाराम स्थित सदर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में आज उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक मरीज इलाज कराने तो आया, लेकिन अपने साथ झोले में तीन जिंदा जहरीले कोबरा सांप लेकर पहुंच गया. जैसे ही उसने बोरे से 8 से 10 फीट लंबे तीन सांपों को बाहर निकाला, डॉक्टर और मरीज जान बचाकर भागने लगे.
क्या है पूरा मामला?
राजपुर निवासी गौतम कुमार इलाके में ‘स्नेक स्नेचर’ के रूप में जाने जाते हैं. गौतम को जहां कहीं भी सांप की सूचना मिलती है, वह उसे रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ देते हैं. पिछले दो-तीन दिनों से उन्होंने तीन विशालकाय कोबरा सांपों को पकड़कर रखा था. शनिवार को वह इन्हें जंगल में छोड़ने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने सांपों को हवा दिखाने के लिए बोरी से बाहर निकाला, तभी एक विषैले कोबरा ने उन्हें डस लिया. जहर फैलने के डर और डॉक्टर को यह बताने के लिए कि किस सांप ने काटा है, गौतम आनन-फानन में तीनों सांपों को बोरी में भरकर सदर अस्पताल पहुंच गए.
अस्पताल में मचा हड़कंप
गौतम जैसे ही ट्रामा सेंटर पहुंचे और सांपों को दिखाया. वहां मौजूद स्टाफ और आम लोगों के होश उड़ गए. करीब 10 फीट लंबे तीन कोबरा को सामने देख पूरे परिसर में हड़कंप मच गया. हालांकि राहत की बात यह है कि गौतम फिलहाल खतरे से बाहर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं. पकड़े गए सांपों को अब वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है.
ठंड में क्यों सुस्त हो जाते हैं सांप?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुस और माघ के महीने में जब तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर जाता है, तो सांपों की गतिविधियां शिथिल हो जाती हैं. सांप ‘कोल्ड ब्लडेड’ जीव होते हैं, इसलिए अत्यधिक ठंड में वे अकड़ जाते हैं और तेज नहीं चल पाते. अक्सर धूप सेंकने के लिए वे बाहर निकलते हैं, लेकिन शीतलहर के दौरान वे काफी सुस्त और कभी-कभी मौत का शिकार भी हो जाते हैं.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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