डूंगरपुर जिले के चौरासी थाना क्षेत्र के वैंजा गांव के समीप गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसे में मां की गोद में ही दो मासूमों की मौत हो गई। हादसा मोड़ पर टेम्पो के अनियंत्रित होकर पलट जाने से हुआ। एक परिवार अपनी बेटी को ससुराल छोड़ने जा रहा था। हादसे में 8 लोग घायल हो गए, जिनमें 2 पुरुष, 5 महिलाएं और एक 5 वर्षीय मासूम शामिल है। सभी घायलों को डूंगरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों मासूमों के शव मोर्चरी में रखवाए गए हैं।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार वागबोल गांव निवासी बलदेव कटारा की पत्नी प्रियंका का डेढ़ माह पहले प्रसव हुआ था। वह तब से अपने पीहर वैंजा गांव में रह रही थी। गुरुवार को पीहर पक्ष के लोग प्रियंका को उसके ससुराल छोड़ने जा रहे थे। सभी लोग टेम्पो में सवार थे। वैंजा मोड़ के पास टेम्पो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।
हादसे में प्रियंका की गोद में बैठे उसके डेढ़ माह के बेटे कृष तथा टेम्पो में सवार रिश्तेदार महिला मंजुला की गोद में बैठे उसके तीन वर्षीय बेटे अरिहंत की मौके पर ही मौत हो गई।
ये हुए घायल
हादसे में प्रियंका (28) पत्नी बलदेव, मंजुला (30) पत्नी कांतिलाल, माया (27) पत्नी नानूराम, बंशी (70) पुत्र नानजी कटारा, कांता (60) पत्नी शंकरलाल, लक्ष्मी (25) पत्नी शांतिलाल, कांति (25) पुत्र नाना तथा सरस्वती (5) पुत्री शांतिलाल घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। ग्रामीणों ने एम्बुलेंस बुलवाकर सभी घायलों को डूंगरपुर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।
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खुशियां मातम में बदलीं
वागड़ क्षेत्र में प्रथा है कि प्रसव के डेढ़ माह तक प्रसूता अपने पीहर में रहती है। इसके बाद उसे ससुराल छोड़ा जाता है। प्रियंका के प्रसव के डेढ़ माह बाद कृष पहली बार अपने घर लौट रहा था। उसके पिता बलदेव सहित पूरा परिवार बेटे के घर आने की खुशी मना रहा था। जैसे ही हादसे और कृष की मौत की खबर मिली, परिवार सन्न रह गया और खुशियां मातम में बदल गईं। ग्रामीणों ने बलदेव और उसके परिवार को ढांढस बंधाया।
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