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Agriculture News: मार्च की शुरुआत में ही बढ़ती गर्मी ने रबी फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है. कई इलाकों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे गेहूं, जौ और सौंफ जैसी फसलें हीट स्ट्रेस का शिकार हो रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में बढ़ोतरी जारी रही तो इस बार उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. जिले में करीब 36 हजार हेक्टेयर में बोई गई फसलों से अनुमानित पैदावार में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है, जिससे किसानों की आय और फसलों की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
मार्च की शुरुआत में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण खेतों में खड़ी रबी की फसलों पर संकट के हालात बनते नजर आ रहे हैं. कई इलाकों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे फसलें हीट स्ट्रेस का शिकार हो रही हैं. इस समय गेहूं, जौ और सौंफ जैसी फसलें दाना बनने और भरने की अवस्था में हैं. ऐसे में अचानक बढ़ी गर्मी फसलों के सामान्य विकास को प्रभावित कर रही है और किसानों की चिंता भी बढ़ा रही है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट रामनिवास चौधरी के अनुसार, यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो जिले के कुल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. अनुमान है कि इस बार कुल पैदावार में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिल सकती है. इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा, क्योंकि उत्पादन कम होने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है. इस स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका बढ़ गई है.

आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में जिले में गेहूं, सौंफ और जौ की कुल 36 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई थी. सामान्य परिस्थितियों में इन फसलों से करीब 5.50 लाख क्विंटल उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी. लेकिन मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी और तेज तापमान के कारण अब उत्पादन घटने की संभावना बन गई है. कृषि विभाग के आकलन के मुताबिक इस बार लगभग 1.10 लाख क्विंटल तक उत्पादन कम हो सकता है.
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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, जब फसल दाना भरने की अवस्था में होती है, तब उसे ठंडे और संतुलित मौसम की आवश्यकता होती है. लेकिन इस बार तापमान 35 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया है, इससे पौधों में फोर्स मैच्योरिटी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रही है और समय से पहले ही सूख रहे है. उन्होंने बताया अचानक गर्मी बढ़ने से गेहूं और जौ का दाना पतला, छोटा और सिकुड़ा हुआ रह जाता है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है.

गर्मी का असर केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मंडियों में फसलों के भाव पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि गुणवत्ता खराब होने के कारण किसानों को 15 प्रतिशत तक कम दाम मिल सकते हैं. वर्तमान में 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा गेहूं गिरकर लगभग 2550 रुपये तक आ सकता है. वहीं 8000 से 9500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही सौंफ की चमक कम होने से किसानों को प्रति क्विंटल करीब 1400 रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है.

नागौर सहायक निदेशक कृषि शंकरराम सिवाक ने बताया कि बढ़ते तापमान से फसलों को बचाने के लिए किसानों को समय पर सिंचाई करना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि मार्च के शेष दिनों में कम से कम दो हल्की सिंचाई करना फसल के लिए लाभकारी रहेगा. सिंचाई सुबह या शाम के समय करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों को झुलसने से बचाया जा सकता है, जिससे गर्मी के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
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