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Pali News : पाली जिले के शिवनाथ सागर और सारण बांध की स्थिति सुधारने के लिए जापान की एजेंसी JICA ने 3.70 करोड़ रुपये जारी किए हैं. इस परियोजना से 8500 किसानों को लाभ मिलेगा और सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी. इस परियोजना के तहत इन दोनों पुराने बांधों और उनकी नहर प्रणाली को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जाएगा.
इस परियोजना के तहत इन दोनों पुराने बांधों और उनकी नहर प्रणाली को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जाएगा. इसका उद्देश्य यह है कि बिना किसी छीजत और सीपेज के पानी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे. इस प्रोजेक्ट से जिले के करीब 8500 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
दो ऐतिहासिक बांधों का होगा जीर्णोद्धार
जिले के सिंचाई तंत्र को मजबूत बनाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जल संसाधन विभाग ने एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है. जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के आर्थिक सहयोग से जिले के दो प्रमुख बांधों, सारण बांध और शिवनाथ सागर बांध का जीर्णोद्धार किया जाएगा. इस परियोजना पर कुल 370.23 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र के हजारों किसान परिवारों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और कृषि उत्पादन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
सारण बांध से 4000 लोगों को मिलेगा लाभ
मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में स्थित सारण बांध का निर्माण वर्ष 1964-65 में किया गया था. अब इस बांध को नई तकनीक के साथ फिर से मजबूत बनाया जाएगा. करीब 224.23 लाख रुपये की लागत से 66 एमसीएफटी क्षमता वाले इस बांध और इसकी 3.36 किलोमीटर लंबी नहरों का पुनर्निर्माण और सुधार किया जाएगा.
जल संसाधन विभाग ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 14 जनवरी 2028 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है. कार्य पूरा होने के बाद सारण और वोपारी गांव के लगभग 495 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था मजबूत हो जाएगी और किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा.
शिवनाथ सागर बांध की नहरों का होगा आधुनिकीकरण
बाली क्षेत्र में स्थित रियासतकालीन शिवनाथ सागर बांध के लिए 146 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. यहां की 5.28 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण पहली बार विशेष प्रकार की ईंटों से किया जाएगा. इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नहरों में पानी का रिसाव लगभग शून्य हो जाएगा. इस बांध से जुड़े लगभग 4500 किसानों को जुलाई 2027 तक इस परियोजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा.
तकनीक और सुविधाओं से सुसज्जित होगा प्रोजेक्ट
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौड़ के अनुसार इस परियोजना में निर्माण कार्य की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. सारण बांध की नहरों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए टाइल लाइनिंग की जाएगी. इसके अलावा दोनों बांधों पर किसानों के बैठने और आपसी चर्चा के लिए 30 गुणा 20 वर्ग फीट के आधुनिक भवन बनाए जाएंगे. इनमें हॉल, कमरा और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. साथ ही पुराने हो चुके पुल, आउटलेट, फॉल्स और साइफन को भी नए सिरे से बनाया जाएगा.
8500 किसान परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा
इन दोनों बांधों के कमांड क्षेत्र में कुल करीब 8500 किसान आते हैं. अभी तक नहरों के जर्जर होने के कारण पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता था और रास्ते में ही काफी मात्रा में पानी व्यर्थ हो जाता था. अब जापानी एजेंसी के सहयोग से कट ऑफ ट्रेंच तकनीक का उपयोग किया जाएगा. इस तकनीक के माध्यम से पानी की एक-एक बूंद को बचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी और क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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