फिश करी की स्वाद का पहली बुनियाद
सबसे पहले ताजी रोहू मछली को एक बर्तन में रखकर अच्छी तरह साफ पानी से धोया जाता है. इसके बाद इसमें हल्दी पाउडर और नमक मिलाकर अच्छे से मिक्स किया जाता है. कड़ाही में तेल गर्म कर मछली को हल्का कुरकुरा होने तक फ्राई किया जाता है और फिर उसे अलग बर्तन में निकालकर रख दिया जाता है.
देसी मसाला पेस्ट से खुशबू और रंग का मेल
प्याज, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और टमाटर को एक साथ पीसकर बारीक पेस्ट तैयार किया जाता है. यही मसाला पेस्ट मछली करी को गाढ़ापन और छत्तीसगढ़ी देसी स्वाद देता है.
कड़ाही में तड़का मसालों की असली पहचान
कड़ाही में तेल डालकर तेजपत्ता, जीरा, हरी मिर्च और मेथी को भून लिया जाता है. जब मसाले हल्के ब्राउन हो जाएं, तब तैयार किया गया मसाला पेस्ट कड़ाही में डालकर करीब 10 मिनट तक पकाया जाता है.
मसालों का पकना बढ़ाता ग्रेवी का स्वाद
अब इसमें हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, नमक और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. मसालों को तब तक भूनते हैं, जब तक तेल ऊपर न आ जाए और ग्रेवी का रंग गहरा न हो जाए.
अंत में कड़ाही में गर्म पानी डालकर ग्रेवी तैयार की जाती है. फिर फ्राई की हुई मछली डालकर चूल्हे की धीमी आंच पर कुछ देर तक पकाया जाता है, जिससे मसाले मछली में अच्छी तरह समा जाते हैं. छत्तीसगढ़ की यह देसी फिश करी सिर्फ एक व्यंजन नहीं बल्कि गांव की परंपरा और चूल्हे की संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जो आज भी स्वाद के शौकीनों की पहली पसंद बनी हुई है.
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