ज्यादा दरदरा रखना नहीं चाहिए
गृहणी लक्ष्मी नायक बताती हैं कि प्याज भाजी का चिला स्वाद में बेहद बेहतरीन होता है और इसे बनाना भी ज्यादा मुश्किल नहीं है. खास बात यह है कि इसे तैयार करते समय न तो बैटर को ज्यादा चिकना पीसना होता है और न ही ज्यादा दरदरा रखना चाहिए. सही संतुलन बनाए रखने से ही चिला कुरकुरा और स्वादिष्ट बनता है. उन्होंने बताया कि चावल के आटे में उड़द दाल का हल्का चूरा मिलाया जाता है, जिससे चिला पकने के बाद क्रंची टेक्सचर देता है.
लक्ष्मी नायक के अनुसार, चिला बनाने के लिए सबसे पहले चावल के आटे में ताजी प्याज भाजी को बारीक काटकर मिलाया जाता है. इसके बाद स्वाद अनुसार नमक डालकर मिश्रण को अच्छी तरह फेंट लिया जाता है, ताकि सभी सामग्री आपस में अच्छे से मिल जाएं. बैटर न ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए और न ही ज्यादा पतला, जिससे तवे पर फैलाने में आसानी हो और चिला समान रूप से पक सके.
पलटकर दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंकना जरूरी
चिला पकाने की विधि भी बेहद सरल है. गर्म तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर बैटर को बराबर मात्रा में फैलाया जाता है. इसके बाद मीडियम आंच पर लगभग 15 मिनट तक इसे पकाया जाता है. इस दौरान चिले को पलटकर दोनों तरफ से अच्छी तरह सेंकना जरूरी होता है, ताकि वह सुनहरा और कुरकुरा बन सके. सही तापमान और समय का ध्यान रखने से चिला न तो जलेगा और न ही कच्चा रहेगा.
प्याज भाजी का यह चिला जब तैयार हो जाता है, तो इसकी खुशबू ही भूख बढ़ाने के लिए काफी होती है. इसे टमाटर, हरी मिर्च और धनिया पत्ती से बनी ताजी चटनी के साथ गरमा-गरम परोसा जाता है. चटनी के तीखे और खट्टे स्वाद के साथ चिले का मेल इसके स्वाद में चार चांद लगा देता है. ठंड के मौसम में यह व्यंजन न केवल शरीर को गर्माहट देता है, बल्कि लंबे समय तक पेट भरा रहने का एहसास भी कराता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यंजन आज भी पारिवारिक मेल-जोल और आत्मीयता का प्रतीक माना जाता है. सुबह के नाश्ते से लेकर शाम की चाय तक, प्याज भाजी का चिला हर वक्त पसंद किया जाता है. सादगी, स्वाद और परंपरा का यह अनूठा संगम छत्तीसगढ़ी खानपान की समृद्ध विरासत को दर्शाता है, जिसे आज की पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है.
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