Pali Special Gulab Halwa Recipe: पाली का गुलाब हलवा केवल एक मिठाई नहीं बल्कि स्वाद और खुशबू का प्रतीक है. होली के समय चैन सिंह की दुकान पर श्रद्धालुओं और प्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ती है. यह हलवा अब देश-विदेश में लोकप्रिय हो गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके मुरीद हैं. गुलाब हलवे में शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची का उपयोग होता है और धीमी आंच पर पकाने से इसकी खास दानेदार बनावट बनती है. पाली में गुलाब हलवा उद्योग का रूप ले चुका है और सालाना कारोबार 20 करोड़ रुपये से अधिक का है.
हालांकि जब बात पाली की आती है, तो यहां की पहचान गुलाब हलवे के बिना अधूरी है. होली का त्योहार नजदीक आते ही पाली के भीतरी बाजार स्थित चैन सिंह की दुकान पर पैर रखने तक की जगह नहीं बचती. स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासियों की भारी भीड़ इस बात की गवाह है कि त्योहार की रौनक को कई गुना बढ़ाने का काम यह गुलाब हलवा करता है.
सात समंदर पार निर्यात हो रहा ‘मिठास’
हैरानी की बात यह है कि इस होली पर गुलाब हलवे की मांग केवल राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं है. दुबई, लंदन और अमेरिका में रहने वाले भारतीय अपने परिजनों से विशेष रूप से गुलाब हलवा भिजवाने की जिद कर रहे हैं. कई परिवार ऐसे हैं जो 5 से 10 किलो तक हलवा पैक करवाकर विदेशों में कोरियर करवा रहे हैं. देखने में साधारण लगने वाला यह हलवा आज एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है. पाली में गुलाब हलवे का सालाना कारोबार 20 करोड़ रुपये से भी अधिक का है. होली के सीजन में कारीगरों को सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिलती और हजारों किलो हलवा हाथों-हाथ बिक जाता है.
क्या है इसका ‘सीक्रेट रेसिपी’?
इस हलवे की खासियत इसकी सादगी है. इसे तैयार करने में केवल तीन मुख्य सामग्रियों का उपयोग होता है, जिसमें शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची शामिल हैं, जिससे यह गुलाब हलवा बनकर तैयार होता है. कारीगरों के अनुसार असली जादू पकाने की टाइमिंग और धीमी आंच का है. दूध को तब तक उबाला जाता है जब तक वह गाढ़ा होकर गहरे मेहरून रंग का न हो जाए. पाली का क्लाइमेट और स्थानीय कारीगरों का हुनर इसे वह दानेदार बनावट देता है, जिसे चखने के बाद कोई खुद को रोक नहीं पाता.
गुलाब हलवा ऐसे बना पाली की सिग्नेचर डिश
गुलाब हलवे के जन्म की कहानी बड़ी दिलचस्प है. करीब 60 साल पहले शहर के जैन मार्केट के पास मूलचंद कास्टिया की मिठाई की दुकान थी. वहां गुलाब पुरी नाम के कारीगर काम करते थे. एक दिन काफी दूध बच गया, जिसे खराब होने से बचाने के लिए उन्होंने उसमें शक्कर डालकर धीमी आंच पर छोड़ दिया. दूध धीरे-धीरे मावे में बदला और उसका रंग गहरा लाल हो गया. जब इसे चखा गया, तो इसका स्वाद किसी भी पारंपरिक मिठाई से बिल्कुल अलग और लाजवाब था. कारीगर गुलाब पुरी के नाम पर ही इस मिठाई का नाम ‘गुलाब हलवा’ रख दिया और देखते ही देखते यह पाली की सिग्नेचर डिश बन गई.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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