Last Updated:
Famous Dishes Of Holi In Rajasthan Jodhpur : जोधपुर की होली पर मावा गुजिया, मावा कचौरी, मखन वड़ा और घेवर की मांग सबसे ज्यादा है. पारंपरिक मिठाइयाँ देसी घी और उम्दा मावे से बनी होती हैं. गिफ्ट हैम्पर का चलन भी बढ़ रहा है. मावा गुजिया को जोधपुर की होली की शान माना जाता है. महीन मैदा की कुरकुरी परत के भीतर मावा, काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का सुगंधित मिश्रण भरा जाता है.
मावा गुजिया को जोधपुर की होली की शान माना जाता है. महीन मैदा की कुरकुरी परत के भीतर मावा, काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का सुगंधित मिश्रण भरा जाता है. हल्की आंच पर सुनहरी तली गई गुजिया की खुशबू ही घर को त्योहारमय बना देती है. कई परिवारों में आज भी दादी-नानी की पारंपरिक रेसिपी का इस्तेमाल किया जाता है. जोधपुर की मावा कचौरी बाहर से खस्ता और अंदर से मावे से भरी होती है और ऊपर से डाली गई हल्की चाशनी इसे और लुभावना बना देती है. इसके अलावा देसी घी में तला हुआ मखन वड़ा भी होली की थाली का अभिन्न हिस्सा है. मुलायम बनावट और हल्की चाशनी में डूबा इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है. सादा या मलाई से सजा हुआ घेवर भी होली के अवसर पर बड़े चाव से खरीदा और परोसा जाता है.
भोग से शुरू होती है मिठास की परंपरा
देसी घी से बनी इन मिठाइयों की दुकानों की रौनक गुलाल के रंगों के बीच और भी आकर्षक दिखाई देती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन मिठाइयों को पहले भगवान को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है. इसके बाद परिवार और मेहमान इन्हें प्रेमपूर्वक ग्रहण करते हैं. यह केवल मिठाई बांटने की परंपरा नहीं है, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलने का एक माध्यम भी है. होली के अवसर पर यह परंपरा परिवारों को और करीब लाती है.
गिफ्ट हैम्पर का बढ़ता चलन
आजकल आकर्षक गिफ्ट हैम्पर का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जिनमें अलग-अलग प्रकार की मिठाइयां और ड्राई फ्रूट्स सजाकर प्रस्तुत किए जाते हैं. कारोबारी लेन-देन में भी इनका विशेष उपयोग होता है. इसके बावजूद जोधपुरवासी पारंपरिक स्वाद को ही पहली पसंद मानते हैं. जोधपुर में होली रंग, रस और रिश्तों का संगम बनकर आती है. यहां की पारंपरिक मिठाइयाँ न केवल स्वाद का आनंद देती हैं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजती हैं. रंगों के इस उत्सव में जब मिठास घुलती है, तो होली की खुशियां कई गुना बढ़ जाती हैं.
About the Author
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.