औषधीय चाय के रूप में होता है उपयोग
डॉ. भट्ट के अनुसार, इस मशरूम को वैज्ञानिक विधि से सुखाकर इसका पाउडर तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग शहद के साथ हर्बल चाय के रूप में होता है। इसमें विटामिन-डी2, पॉलीसैकेराइड्स और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। उन्होंने यह चाय बेंगलुरु, दिल्ली और चंडीगढ़ के कई मरीजों को भेजी है, जिनसे बहुत ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। खासकर कैंसर पीड़ित लोग और लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोग इसे काफी असरदार बता रहे हैं
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चागा मशरूम- क्यों है यह खास
दुर्लभ विकास- यह केवल 100 साल पुराने भोजपत्र के पेड़ के तनो पर ””परजीवी””के रूप में उगता है।
शक्तिशाली इम्यून बूस्टर- यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण को खत्म करता है।
कैंसर से लड़ाई- इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स फेफड़ों, ब्रेस्ट और लीवर के कैंसर की रोकथाम में सहायक हैं।
डायबिटीज में राहत- यह शुगर लेवल को नियंत्रित करने और शरीर को डिटॉक्स करने में कारगर है।
विशेष सलाह
डॉ. विजय भट्ट ने आगाह किया है कि जंगली मशरूमों की पहचान करना कठिन होता है, इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी मशरूम का सीधा सेवन जानलेवा हो सकता है।
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