भोजशाला विवाद की पृष्ठभूमि
भोजशाला का विवाद वर्षों पुराना है। इस स्थल को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपना-अपना अधिकार जताते रहे हैं। हिंदू समुदाय इसे मां सरस्वती का मंदिर, जबकि मुस्लिम समुदाय कमाल मौलाना मस्जिद के रूप में मानता है।
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गत वर्ष हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा टाइटल तय करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 98 दिनों तक सर्वे किया गया। सर्वे रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उस आदेश पर रोक लगा रखी है।
भोजशाला पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित इमारत है, जहां वर्ष 2003 के आदेश के अनुसार मंगलवार को हिंदू समाज को पूजा करने और शुक्रवार को मुस्लिम समाज को जुम्मे की नमाज की अनुमति है। बसंत पंचमी पर भी हिंदू समाज को पूजा की अनुमति दी जाती है। विवाद की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ती है। वर्ष 2026 में 23 जनवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार होने के कारण प्रशासन के सामने एक बार फिर चुनौतीपूर्ण स्थिति बनने की आशंका है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस द्वारा समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है और फ्लैग मार्च के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था या अशांति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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