Prabhat Kumar Shares Board Exam Experiences : रांची के 82 वर्षीय प्रभात कुमार ने 65 साल पहले बोर्ड एग्जाम का अनुभव साझा किया. उन्होंने कहा कि उस समय लोग लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते थे. मास्टर साहब का बहुत बड़ा सम्मान होता था. उस समय फर्स्ट डिवीजन लाने वाले स्टूडेंट को टैलेंटेड माना जाता था. जबकि आजकल सभी फर्स्ट डिवीजन से पास हो रहे हैं.
प्रभात कुमार आगे बताते हैं कि जब हम लोग स्कूल जाते थे तो 1 आना मिलता था. जिससे हम लोग मूंगफली खाते थे और उस समय बुढ़िया का बाल का एक मिठाई चलता था, जिसको आज कैंडी फ्लॉस बोलते हैं. वो खाते थे. फुल पैंट क्या होता है. वह तो हम लोग जानते ही नहीं थे. सिर्फ लोगों के पास हाफ पैंट था.
चिराग वाले लालटेन से करते थे पढ़ाई
प्रभात कुमार आगे बताते हैं कि उस समय बिजली हर जगह नहीं होती थी. जैसे ही शाम होती थी. एक बड़ा सा लालटेन उस समय जिसे अलाउद्दीन का चिराग कहा जाता था. क्योंकि बहुत रोशनी करता था और उसकी रोशनी में हम लोग कम से कम 6 से 7 लोग गोल बनाकर बैठ जाते थे. इसके बाद तीन से चार घंटा बढ़िया से पढ़ाई करते थे. यह लालटेन एक बार जलता था और 4 घंटे तक लगातार चलता था और फिर बंद कर दिया जाता था.
उन्होंने बताया कि उस समय मास्टर साहब को गजब का इज्जत दिया जाता था. उस समय वह लोग समाज के सबसे प्रतिष्ठित लोगों में से एक होते थे. वह सामने से पार हो रहे हैं तो हम लोग अपना रास्ता बदल लेते थे, हिम्मत नहीं होती थी कि सामने से पार हो जाएं और मास्टर साहब भी ऐसा कि बच्चों के लिए सुबह 4:00 बजे तो कभी रात में 9:00 बजे बोर्ड एग्जाम के दौरान घर पर पहुंच जाएं कि बच्चे पढ़ तो रहे हैं न यह देखने के लिए.
20 किलोमीटर दूर पड़ता था सेंटर
प्रभात बताते हैं कि 20 किलोमीटर दूर जंगल के बीच में एक सरकारी स्कूल था. वहां पर हमारा सेंटर पड़ा था. मतलब ऐसा जंगल के बीच में जो कोई परिंदा पर मरने वाला नहीं था. चीटिंग तो दूर की बात,नलेकिन हां, एक बात थी उस समय, जो फर्स्ट डिवीजन लाता था. उसको काफी इंटेलिजेंट और टॉपर माना जाता था, लेकिन आज तो 60% का कोई वैल्यू ही नहीं है.
अगर आप 50% से ऊपर लाते हैं तो आप बहुत जानकार, पढ़ने वाले और इंटेलिजेंट बच्चे हैं. समाज में बड़े गर्व से हम लोग बोलते थे कि हम लोग फर्स्ट डिवीजन हैं, लेकिन आज सीधा इसके उलट है और उस समय हमारे पास कोई स्मार्टफोन नहीं होता था. किसी से बात करना है तो दो दिन इंतजार करना होता था. आज वक्त काफी बदल गया है. काफी फैसिलिटी आ गई है, लेकिन उस समय एक चीज थी. शांति सुकून, हरा-भरा वातावरण और अपनों के बीच बड़ा प्यार था. सिर्फ अपनों के बीच नहीं, आस पड़ोस और पूरा का पूरा जो गांव था, लगता था वही पूरा परिवार है, लेकिन आज ऐसा नहीं है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें
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