Mccluskieganj weather: उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर झारखंड तक पहुंच गया है. रांची से 60 किलोमीटर दूर मैकलुस्कीगंज में गुरुवार को सुबह तापमान शून्य से नीचे -0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जमीन पर जमी ओस बर्फ में बदल गई. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में पारा और गिर सकता है.देखिए वहां की अनोखी तस्वीरें
उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है. पहाड़ों पर तापमान माइनस में पहुंच चुका है और कई इलाकों में लगातार बर्फबारी हो रही है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग शिमला, मनाली और कश्मीर जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं. लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि झारखंड के एक शहर में भी तापमान माइनस में पहुंच गया है, तो शायद आपको यकीन न हो. हालांकि ये बिल्कुल सच है.

रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मैकलुस्कीगंज में इन दिनों ठंड अपने चरम पर है. बीते कुछ दिनों से यहां कड़ाके की सर्दी पड़ रही है और गुरुवार की सुबह तापमान शून्य से नीचे -0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. स्थानीय लोगों ने तापमान मापने वाली डिवाइस के जरिए पारे को रिकॉर्ड किया. ठंड का असर इतना ज्यादा है कि सुबह-सुबह जमीन पर जमी ओस की बूंदें बर्फ में तब्दील नजर आईं. गाड़ियों की छतें, घास और घरों की छप्पर तक सफेद चादर से ढकी दिखाई दीं.

मौसम विभाग के अनुसार. उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी और ठंडी हवाओं का सीधा असर झारखंड के इस इलाके पर पड़ रहा है. पूर्वानुमान है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में मैकलुस्कीगंज का तापमान माइनस 0.5 डिग्री से भी नीचे जा सकता है. ऐसे में ठंड और शीतलहरी का असर और बढ़ने की संभावना है.
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मैकलुस्कीगंज कोई आम शहर नहीं है. कभी एंग्लो-इंडियन समुदाय का बसेरा रहा यह इलाका अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है. जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा यह शहर अपनी खूबसूरती और ठंडी आबोहवा के कारण देश-विदेश में मशहूर रहा है. इसे “मिनी लंदन” भी कहा जाता है. यहां की जलवायु कम नमी वाली है और सर्दियों में अक्सर पाला पड़ता है. वर्ष 2013 में जनवरी महीने में यहां का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था.

अगर आप मैकलुस्कीगंज पहुंचते हैं, तो आपको अंग्रेजों के दौर में बने कई हेरिटेज बंगले देखने को मिलेंगे. डांस क्लब, वॉच टावर और बड़ी-बड़ी कोठियां आज भी ब्रिटिश काल की जीवनशैली की झलक दिखाती हैं. विक्टोरियन स्टाइल के बंगले, फलदार बगीचे और घुमावदार सड़कें यहां आने वाले हर सैलानी को आकर्षित करती हैं. यहां की शांत फिजा और प्राकृतिक सुंदरता लोगों को कुछ पल के लिए शहरों की भागदौड़ से दूर ले जाती

कभी इस इलाके में लगभग 400 गोरे परिवार रहा करते थे. इसे लेफ्टिनेंट मैक्लुस्की ने बसाया था. समय के साथ हालात बदले और आज यहां गिने-चुने दो-तीन एंग्लो-इंडियन परिवार ही बचे हैं. इसके बावजूद इस कस्बे की पहचान और विरासत आज भी जिंदा है.

इन दिनों मैकलुस्कीगंज फिल्म कलाकारों और फिल्म निर्माताओं की भी पसंद बनता जा रहा है. यहां कई बांग्ला फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है. मार्च 2016 में निर्देशक और अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म “डेथ इन गंज” की शूटिंग यहीं की थी. कोंकणा के बचपन की यादें इस जगह से जुड़ी रही हैं. इसके अलावा “एमएस धोनी” और “खाकी” जैसी चर्चित फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग भी यहां हो चुकी है.

<br />रांची के पास कांके जैसे इलाकों में भी ठंड का असर साफ नजर आ रहा है. कांके का न्यूनतम तापमान इन दिनों 6 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया है, जबकि 6 और 7 जनवरी को यह 2 डिग्री तक पहुंच गया था. मौसम विभाग ने यहां भी पारा और गिरने का अनुमान जताया है.
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