सबसे पहले बात अरूबा की
सबसे पहले बात करते हैं अरूबा की, तो बता दें कि यह घर में ही, मतलब अपने किचन में, जैसे खाना बनाते हैं वैसे ही यह फेस वॉश बनाती हैं. जी हां. बॉडी लोशन से लेकर तरह-तरह के साबुन, यह सारे प्रोडक्ट हैंडमेड होते हैं. अरूबा बताती हैं, ‘मैं इन सभी चीजों का बेस कोलकाता से मंगवाती हूं और फिर इसमें सारे फ्लेवर मिलाती हूं, जैसे खाना बनता है न, शुद्धता के साथ. वैसे ही हमारे किचन में ये सारे प्रोडक्ट तैयार होते हैं.’
एक बार ले लिए तो फिर आएंगे वापस
यही कारण है कि लोगों का हम पर इतना भरोसा है. आज मेरी उम्र मात्र 18 साल है और हम लोगों ने अब तक 18 लाख से ऊपर का बिजनेस कर लिया है. एक बार अगर आप हमारे प्रोडक्ट लें, तो दोबारा आप लौटकर हमारे पास आएंगे, इसकी हमारी गारंटी है. बता दें, अरूबा रांची के डोरंडा में रहती हैं और वहीं पर अपनी शॉप भी चलाती हैं.
दुल्हन को और सजा देती हैं अंजलि
साथ ही अंजलि के दुल्हन आउटफिट का हर कोई दीवाना है. अंजलि बताती हैं, ‘हमारे यहां सिर्फ आउटफिट नहीं मिलता, बल्कि दुल्हन की ड्रेस से मैचिंग क्लच, गहने से लेकर सैंडल तक हर एक चीज का पूरा सेट तैयार कर दिया जाता है. यही कारण है कि दुल्हनें हमारे पास आना पसंद करती हैं. उन्हें पता है कि यहां एक बार आ गए, तो कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ती. खास बात यह है कि हम कस्टमाइज भी करते हैं, यानी आपको क्या पसंद है, वह बताइए, हम वैसे ही बनाकर दे देंगे.’
हर महीने 50 हजार की कमाई
‘ऐसे में आज हमारे कस्टमर पैन इंडिया लेवल पर हैं. चेन्नई से लेकर दिल्ली, जयपुर से लेकर कोलकाता तक से हमारे पास ऑर्डर आते हैं. इंस्टाग्राम पर हमारा हैंडल है, जहां लोग हमें डीएम करते हैं और हम उन्हें रिप्लाई करते हैं. वहां से भी हमें कई ऑर्डर मिलते हैं. आज आराम से महीने की 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है.’
क्लास 11 में शुरुआत
वहीं रिया की बात करें, तो इन्होंने क्लास 11 में ही क्लोन बास्केट नाम से अपना एक ब्रांड लॉन्च किया. वह ऑनलाइन इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए मार्केटिंग करती हैं. रिया बताती हैं, ‘हमारे पास आपको डिजाइनर क्लचर और बैंड देखने को मिलते हैं. क्योंकि लड़कियों के बीच छोटी-छोटी चीजों को लेकर काफी क्रेज देखा जाता है. जब मैं क्लास 11 में थी, तो सोचा पहले इन्हीं छोटी चीजों से शुरुआत की जाए.
खुद उठाती हैं अपना खर्च
इसके बाद हमने डिजाइनर कैंडल्स बनाना शुरू किया. फिर नेकलेस पर काम करना शुरू किया. इस तरह धीरे-धीरे ज्वेलरी में आगे बढ़ते चले गए. अब हालात यह हैं कि अगर किसी मेले में स्टॉल लगाएं, तो दो दिन में ही सामान आउट ऑफ स्टॉक हो जाता है. खासकर स्कूल की फीस से लेकर आगे की पढ़ाई के लिए सारा पैसा मैं खुद लगाती हूं. मां-बाप पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं हूं और ऊपर से घर को भी सपोर्ट करती हूं.’
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