मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाओं के बीच एक मंत्री जी ने दूसरे मंत्री से मजाक ही मजाक में कह दिया- अब क्या कैबिनेट से बाहर चला जाऊं? बाड़मेर में एक महिला जज ने अचानक स्कूल वैन रुकवा ली, जब निरीक्षण करने अंदर घुसीं तो अव्यवस्था देख भड़क उठीं। श्रीगंगानगर जिले में एक मिस्त्री ने कड़ी मेहनत कर मंदिर बनाया…लेकिन बनवाने वालों से नाराज होकर उसी के गुंबद के ऊपर चढ़ गया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. कृषि मंत्री ने किया कानून मंत्री से मजाक
किरोड़ी बाबा के जलवे निराले हैं। आमतौर पर उबाऊ लगने वाले शासन-प्रशासन के काम में हल्के-फुल्के मनोरंजक पल तलाश ही लेते हैं।
कभी जेसीबी पर चढ़ जाते हैं तो कभी चाय की थड़ी पर बैठकर हथेली पर ‘आश्वासन’ लिख देते हैं। साथियों की साधारण बातों में भी वे टांग खिंचाई कर ही देते हैं।
जयपुर सीएमओ में मंत्रियों की मीटिंग हुई थी। मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं चल ही रही हैं। मीटिंग के बाद मंत्रीगण चहलकदमी करते हुए आ रहे थे। इस दौरान कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने किरोड़ी बाबा को आवाज लगाई।
उन्होंने रास्ता दिखाने के मकसद से इशारा कर कहा- डॉक्टर साहब, इधर।
किरोड़ी लाल रुके। पलटकर देखा तो कानून मंत्री जोगाराम पटेल। उन्होंने तुरंत कानून मंत्री की टांग खींची। बाहर जाने वाले रास्ते की तरफ इशारा कर बोले-किधर भेज रहे हो मेरे को? उधर जाऊं? आप कह रहे हो न कि इधर जाओ।
जोगाराम मुस्कुराने लगे। किरोड़ी बाबा ने शिकायती अंदाज में कहा- मैं मुख्यमंत्री जी को कह दूंगा, उन्होंने (जोगाराम) मना किया है कि कैबिनेट में आने की जरूरत नहीं है। इस पर सभी लोग खिलखिलाकर हंस पड़े।
जयपुर में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मजाक में कानून मंत्री जोगाराम पटेल से कहा कि आपने मुझे कैबिनेट से बाहर जाने को कहा।
2. जज मैडम बोलीं-बच्चे जानवर हैं क्या?
ऐसे-ऐसे देश हैं, जहां जानवरों के लिए खास कानून बने हुए हैं। समाज में नहीं, लेकिन फिल्मी दुनिया के लोग जानवरों को लेकर सचेत हैं।
जानवरों को लेकर फिल्म के शुरू में ही डिस्क्लेमर दिया जाता है कि हमने फिल्म में किसी जानवर का प्रयोग नहीं किया, न पशु क्रूरता की है।
लेकिन यहां बात जानवरों की नहीं कर रहे। बात है बच्चों की। जिन्हें बाड़मेर में स्कूल वैन में जानवरों की तरह भरे देख विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मैडम भड़क उठीं।
स्कूल वैन में ठूंस-ठूंस कर बच्चे भरने के लिए एक्स्ट्रा बेंच तक लगाई गई थी। मैडम लताड़ पिलाना शुरू किया तो फिर देखा नहीं कि सामने कौन है।
चपरासी को लताड़ा। ड्राइवर को लताड़ा। खलासी को लताड़ा।
असल लताड़ उस प्राइवेट स्कूल के मालिक, संचालक और कर्ता-धर्ता को पड़नी चाहिए थी जो सबके देखते हुए भी आंखें मूंदे हुए थे।
आखिर पुलिस और अन्य अधिकारियों को समय-समय पर चेक करने और रिपोर्ट देने का आदेश देते हुए मैडम चली गईं। अब कुछ दिन स्कूल वैन वालों को चौकन्ना रहना पड़ेगा। फिर सब कुछ ढर्रे पर आ जाएगा।

बाड़मेर में विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव कृष्णा गुप्ता ने स्कूल वैन मे ठूंस-ठूंस कर भरे बच्चों को देख ड्राइवर को फटकार लगा दी।
3. वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार
किसी के ‘अर्थशास्त्र’ पर चोट होगी तो फिर ‘राजनीति विज्ञान’ सामने आएगा ही। वकीलों के साथ यही हो रहा है। जोधपुर में पुलिस अधिकारी को सस्पेंड कराने के बाद वकीलों में जोश है।
सरकार ने एक एक्ट में संशोधन किया है। यह एक्ट रजिस्ट्री को लेकर है। संशोधन के अनुसार सोसाइटी पट्टे की सीधी रजिस्ट्री नहीं होगी। भू-रूपांतरण करना होगा।
इसका मतलब ये है कि रजिस्ट्री दफ्तरों में पंजीयन और मुद्रांक का काम करने वाले वकीलों की जेब पर असर पड़ेगा। उनका धंधा मंदा होगा। यह कैसे बर्दाश्त होगा।
जयपुर में रजिस्ट्री दफ्तर में वकीलों का झुंड नारेबाजी करता पहुंचा। वहां काम कर रहे साथी वकीलों को काम से रोका। बोले- चलो-चलो, बहुत हुआ, बाहर चलो। लाइट बंद करो।
सभी वकील काम छोड़कर बाहर आ गए। अब दबाव समूह यह ‘गणित’ बैठाने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार संशोधन वापस ले ले।

जयपुर रजिस्ट्री दफ्तर में वकील पहुंचे और काम कर रहे साथियों से बाहर चलने को कहा।
4. चलते-चलते..
बड़े बुजुर्गों का कहते हैं- काम के बाद मजदूर हाथ धोये, इससे पहले उसकी दिहाड़ी जेब में डाल दो। हमारी मौसी भी कहती थीं- गरीब की हाय बहुत बुरी होती है।
यह बात आम तौर पर सब जानते हैं। लेकिन गरीब का पैसा रोकने वालों की कमी नहीं। श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ के छोटे से गांव 15ए में भी ऐसा ही हुआ।
गांव के ही एक धनवान बाशिंदे ने रामदेवजी का मंदिर बनवाया। ठेका राजमिस्त्री पूर्णराम को दिया। काम भगवान का था। इसलिए पूर्णराम ने मन से काम किया।
मंदिर पूरा हुआ तो राजमिस्त्री ने बकाया धनराशि मांगी। बकाया थे 81 हजार रुपए। निर्माण कराने वाले की नीयत खराब हो गई। उसने आधा पैसा देकर टरकाने की बात की।
पूर्णराम अपूर्ण राशि लेने को तैयार नहीं था। जब काम पूरा हो गया तो पैसा आधा क्यों? यही सोचकर वह गुस्से में मंदिर के शिखर पर चढ़ बैठा। बोला-पूरा पैसा मिलने के बाद ही उतरूंगा, वरना जय सीताराम।
5 घंटे तक पूर्णराम गुंबद की चोटी पर चढ़ा रहा। आखिर 70 हजार में मामला सेट हुआ तब वह उतरकर नीचे आया।

श्रीगंगानगर में अनूपगढ़ के गांव 15ए में मंदिर के शिखर पर बैठा राजमिस्त्री पूर्णराम।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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