राजस्थान में 15 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने पर संकट नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं आने के चलते अभी तक आरक्षण तय नहीं हो सका है। चुनाव नहीं हुए तो इसका खामियाजा हजारों पंचायतों को भुगतना पड़ सकता है। केंद्रीय वित्त आ
अधिकारियों के मुताबिक- केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान को मिलने वाला करीब 3 हजार करोड़ का पिछले डेढ़ साल का फंड रोक रखा था। इसमें से करीब 1100 करोड़ रुपए मिल गए हैं। यह फंड केवल उन 3 हजार 800 से अधिक पंचायतों के लिए जारी हुआ है, जिनका कार्यकाल सितंबर-अक्टूबर में पूरा होने वाला है। अगर चुनाव नहीं होते हैं तो यह फंड मिलना मुश्किल हो जाएगा।
मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- कैसे यह फंड रिलीज होता है? यह ग्राम पंचायतों के विकास के लिए कितना जरूरी है?
ग्रांट के लिए चुने हुए जनप्रतनिधियों का होना अनिवार्य पंचायतीराज विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया- पंचायतीराज संस्थाओं की तीन स्तरीय प्रणाली और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवाने पर अनुदान नहीं मिलता है। पंचायतीराज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है।
सरकार ने अभी पंचायतों के सचिवों को प्रशासक लगा रखा है। चुनाव नहीं करवाए हैं। ऐसे में 15वें केंद्रीय वित्त आयोग ने फंड जारी नहीं किया है। आयोग की ओर से अनुदान की पहली किस्त वित्तीय वर्ष 2024-25 की जून-जुलाई में और दूसरी किस्त नंवबर-25 में आनी थी। ऐसे में प्रदेश की पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय ग्रांट पर संकट गहरा सकता है।
इन योजनाओं के लिए मिलते हैं करोड़ों रुपए प्रदेश की पंचायतों को हर वर्ष केंद्रीय वित्त आयोग से विभिन्न मदों में करोड़ों रुपए की सहायता मिलती है। स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की राशि शामिल है। इन योजनाओं की शर्तों में पंचायतों में निर्वाचित निकायों का होना प्रमुख है। बिना चुनाव के जनप्रतिनिध नहीं चुने जाते हैं। ऐसे में यह राशि या तो अटक सकती है या फिर जारी होने में देरी हो सकती है।
फंड नहीं मिलने से क्या नुकसान?
- सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई व्यवस्था नहीं
- नए बायो गैस एवं जैविक खाद प्लांट प्रबंधन कार्य धीमा
- ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन कार्य बाधित
- सफाई कर्मियों के नए उपकरण खरीद पर रोक
- पार्कों और खेल मैदान की चारदीवारी और फुटपाथ निर्माण पर ब्रेक
- पंचायती राज संस्थाओं के कार्यालयों में इंटरनेट की सुविधा बाधित
- पंचायती राज के अधीन विद्यालयों में कक्षा-कक्षों का निर्माण प्रभावित
- पेयजल टंकियों के निर्माण का कार्य धीमा हुआ
- पेयजल पाइप लाइन की स्थापना एवं रख-रखाव पर असर
5 साल के लिए चुने जाते हैं सरपंच राजस्थान की 11,310 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इनमें से अधिकतर पंचायतों में सरकार ने मौजूदा सरपंचों को प्रशासक के रूप में कार्यरत रखने के आदेश जारी किए हैं। राज्य में 1,09,228 पंच, 11,320 सरपंच जनता से चुने गए प्रतिनिधि हैं।
प्रदेश में करीब 7 हजार सरपंचों का कार्यकाल जनवरी-फरवरी और मार्च में खत्म हो गया था। शेष ग्राम पंचायतों का कार्यकाल सितंबर-अक्टूबर में खत्म हो गया था। कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत सरपंच 5 साल के लिए चुने जाते हैं।

पंचायत चुनाव में देरी की वजह क्या है?
- आरक्षण निर्धारण के लिए गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलना।
- बिना रिपोर्ट के एससी-एसटी के लिए आरक्षण निर्धारण नहीं हो पा रहा।
- आरक्षण के आंकड़ों के बिना राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी नहीं कर सकता।
ओबीसी आयोग क्यों नहीं दे पा रहा रिपोर्ट? ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े गलत हैं। सही जानकारी नहीं दी है। ऐसे में जनसंख्या निर्धारण के लिए आंकड़े फिर से दिए जाएं। आयोग के पत्र से साफ जाहिर है कि आरक्षण निर्धारण के लिए अभी समय लगेगा। जब आरक्षण निर्धारण ही नहीं हुआ तो रिपोर्ट कैसे दे सकते हैं।
क्या कहते हैं पंचायती राज सचिव पंचायती राज सचिव जोगाराम का कहना है कि भारत सरकार को फंड जारी करने के लिए फिर से पत्र लिखा है। इस संबंध में केंद्र के सामने मामला पहले भी उठाया था। एक बार केंद्र के अधिकारियों के सामने सारी स्थिति रखी जाएगी। अधिनियम के अनुसार समय पर चुनाव न होने पर प्रशासक लगा रखे हैं।

राजस्थान सरपंच संघ ने कहा- अप्रैल से पहले चुनाव होना संभव नहीं लग रहा राजस्थान सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान का कहना है कि वर्तमान में अप्रैल से पहले चुनाव होना संभव नहीं लग रहा है। ऐसे में केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाल फंड अटक सकता है। वित्त आयोग यह राशि जनसंख्या के हिसाब से देता है। यह राशि घटती-बढ़ती रहती है। केंद्र सरकार ने टाइड और अनटाइड फंड के तहत राज्य को दिए जाने वाले 3 हजार करोड़ रुपए में से सिर्फ 1100 करोड़ रुपए राजस्थान को दिए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग कर चुका अपनी तैयारी ओबीसी आयोग ने भले ही अपनी रिपोर्ट नहीं दी हो, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग सभी तैयारियां कर चुका है। आयोग 25 फरवरी को ही फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर चुका है। ईवीएम और बैलेट बॉक्स की व्यवस्था करके उन्हें अपडेट किया जा चुका है। ट्रेनिंग भी हो चुकी है। राज्य सरकार से वार्डों के आरक्षण की रिपोर्ट मिलते ही आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।

राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर चेताया था।
सरकार को चेता चुका राज्य निर्वाचन आयोग सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक 15 अप्रैल तक पंचायतीराज चुनाव कराए जाने हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज विभाग को लेटर लिखकर चेताया है। आयोग ने लेटर में अफसरों को चेतावनी दी है कि तय समय में चुनाव नहीं हुए और सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की तो इसके लिए पंचायतीराज विभाग के अफसर जिम्मेदार होंगे।
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केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान को मिलने वाला करीब 3 हजार करोड़ का पिछले डेढ़ साल का फंड रोक रखा है। इस फंड का इस्तेमाल स्वच्छ भारत मिशन जैसी केंद्र से जुड़ी योजनाओं को पूरा करने में होता है। पढ़ें पूरी खबर…
पंचायत चुनाव पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को चेताया:कहा-15 अप्रैल तक इलेक्शन नहीं हुए तो कोर्ट की अवमानना कार्रवाई के लिए अफसर जिम्मेदार होंगे

प्रदेश में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट नहीं मिलने से पंचायतीराज चुनाव में देरी हो रही है। इसे लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को चेताया है। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक 15 अप्रैल तक पंचायतीराज चुनाव कराए जाने हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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