राजस्थान में हजारों पेंशनर्स लंबे समय से अपने पेंशन प्रकरणों के निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं। खासकर शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में मामले लंबित होने के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त (पेंशन) विभाग ने निर्देश जारी कर नियमित रूप से पेंशन अदालत आयोजित करने का फैसला किया है, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर उनका हक मिल सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार शिक्षा विभाग में 31 मार्च 2026 तक करीब 2200 पेंशन प्रकरण लंबित हो जाएंगे। इनमें लगभग 700 मामले ऐसे हैं, जिनमें सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इन मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
कैसे काम करेगी पेंशन अदालत?
पेंशन अदालतें संभाग स्तर पर आयोजित की जाएंगी। संबंधित विभागों के अधिकारी, कोषाधिकारी और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। मौके पर रिकॉर्ड की जांच कर लंबित प्रकरणों का समाधान किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की सभा में अलर्ट! यहां कार्यक्रम में तीन संदिग्ध पकड़े गए, इंदौर से निकला कनेक्शन
क्या नहीं आएंगे सुनवाई में?
नीतिगत और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को पेंशन अदालत में शामिल नहीं किया जाएगा। जिन प्रकरणों का निस्तारण सामान्य प्रक्रिया से संभव है, उन्हें अदालत की प्रतीक्षा में नहीं रोका जाएगा। सरकार का कहना है कि प्रक्रियात्मक और तकनीकी त्रुटियों के कारण पेंशन मामलों में देरी होती है। पेंशन अदालत के जरिए इन बाधाओं को दूर कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
पेंशन अदालत में समाधान की प्रक्रिया क्या होगी?
राजस्थान सरकार ने लंबित पेंशन प्रकरणों के निस्तारण के लिए संभाग स्तर पर पेंशन अदालत आयोजित करने की प्रक्रिया तय की है। पेंशनर्स अपने आवेदन ऑनलाइन पोर्टल और निर्धारित माध्यमों से प्रस्तुत कर सकेंगे।
पेंशन अदालत में संबंधित विभागों के अधिकारी, कोषाधिकारी और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मौके पर ही लंबित प्रकरणों की सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा। जिन मामलों में दस्तावेजों की कमी या प्रक्रियात्मक त्रुटियां होंगी, उन्हें चिन्हित कर संबंधित विभाग को समयबद्ध कार्ययोजना के तहत निस्तारण के निर्देश दिए जाएंगे।
साथ ही जिला स्तर पर पूर्व समीक्षा बैठकें आयोजित कर लंबित और अतिदेय प्रकरणों की प्रगति की निगरानी की जाएगी। पेंशन अदालत के बाद एक माह के भीतर राज्य स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी मामलों का समय पर समाधान हो।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.