राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी ने गुरुवार को सीताफल एक्सीलेंस सेंटर में आयोजित किसान संवाद प्रोग्राम में किसानों से सीधा संवाद किया। इस प्रोग्राम में जिलेभर से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और अपनी जमीनी समस्याएं खुलकर आयोग अध्यक्ष के सामने रखीं। संवाद के दौरान कुल 129 किसान मौजूद रहे, जिनमें 47 महिलाएं और 82 पुरुष किसान शामिल थे। किसानों ने बीमा क्लेम, समर्थन मूल्य पर उपज की खरीद, जंगली सूअर का आतंक, बिजली की कमी, उर्वरक और यूरिया की किल्लत, नकली खाद, जैविक खेती, एथेनॉल फैक्ट्री और गन्ना अनुसंधान केंद्र जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। यूरिया और खाद की किल्लत से खेती प्रभावित किसानों ने बताया कि उन्हें समय पर खाद और यूरिया नहीं मिल पा रहा है, जिससे फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कई किसानों ने कहा कि बुवाई के समय खाद न मिलने से फसल कमजोर हो जाती है और लागत बढ़ जाती है। संवाद में यूरिया की कालाबाजारी और सहकारी समितियों में नियमों के खिलाफ खाद बिक्री का मुद्दा भी सामने आया। किसानों का कहना था कि जब जरूरत के समय खाद नहीं मिलती, तब उन्हें मजबूरी में महंगे दामों पर खरीद करनी पड़ती है। किसानों की प्रमुख मांगें और सुझाव किसान नारायण सिंह साडास ने उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग रखी, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके। उन्होंने बीमा जिला प्रबंधक समिति में किसानों को सदस्य बनाने और रेलवे स्टेशन मार्ग स्थित किसान भवन को किसानों के उपयोग के लिए किराए से मुक्त कराने की भी मांग की। किसान शंभूलाल जाट ने नकली डीएनपी उर्वरक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रतिदिन पांच घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति की मांग उठाई। किसानों का कहना था कि नकली खाद से फसल खराब हो रही है और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। पानी, रास्ते और पुरानी मिलों का मुद्दा उठाया भूपालसागर क्षेत्र के पंचायत सदस्य सत्यनारायण अहीर ने खेतों तक पहुंच के रास्ते खुलवाने की मांग रखी। उन्होंने साल 1992 से बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा चालू करने और पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ सभी पात्र किसानों को दिलाने की बात कही। किसानों ने कहा कि खेतों तक रास्ते नहीं होने से खेती के काम में दिक्कत आती है और शुगर मिल बंद होने से गन्ना किसानों को मजबूरी में दूसरी फसलें अपनानी पड़ी हैं। किसानों ने एमएसपी, मुआवजा और एथेनॉल फैक्ट्री की मांग की किसान बद्रीनारायण ने एमएसपी से कम दाम पर खरीद पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने मक्का को उचित दाम दिलाने के लिए एथेनॉल फैक्ट्री स्थापित करने, अतिवृष्टि का समय पर मुआवजा देने, यूरिया की कालाबाजारी रोकने और सहकारी समितियों में बिना आदेश खाद बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग रखी। किसानों ने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित होने से ही किसान को अपनी फसल का सही दाम मिल सकता है। महिला किसान की समस्या और विशेषज्ञों की सलाह महिला किसान हेमलता पुठोली ने गेहूं की फसल में पीलेपन की समस्या उठाई। इस पर कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि यह समस्या नाइट्रोजन, सल्फर या जिंक की कमी, जलभराव या जड़ सड़न के कारण हो सकती है। विशेषज्ञों ने संतुलित उर्वरक उपयोग, जिंक सल्फेट के छिड़काव, खेतों में उचित जल निकास और नियमित निगरानी की सलाह दी। किसान गंगरार क्षेत्र के सुरेश शर्मा ने कृषि अनुदान बढ़ाने और दो हेक्टेयर भूमि सीमा की शर्त हटाने की मांग रखी। जैविक खेती और बीमा योजना पर सवाल निंबाहेड़ा के जैविक किसान प्रहलाद उपाध्याय ने पीएम फसल बीमा योजना में सुधार, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर पर सब्सिडी, फसल पकने तक बीमा सुरक्षा, फर्जी क्लेम पर रोक और कृषि व गन्ना अनुसंधान केंद्र खोलने की मांग रखी। इस पर डिप्टी डायरेक्टर रमेश आमेटा ने बताया कि मक्का एथेनॉल फैक्ट्री, मक्का उत्कृष्टता केंद्र और गन्ना अनुसंधान केंद्र की मांग पहले ही केंद्र सरकार के समक्ष रखी जा चुकी है। आयोग अध्यक्ष का भरोसा और घोषणाएं किसान संवाद को संबोधित करते हुए आयोग अध्यक्ष सी.आर. चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी 2027 से किसानों को दिन में बिजली आपूर्ति देने का लक्ष्य रखा गया है और बिजली तंत्र को मजबूत करने के लिए निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य बनेगा और दूसरे राज्यों को भी बिजली सप्लाई करेगा। सोलर, खाद-बीज और गौवंश पर फोकस कर रही सरकार सी.आर. चौधरी ने बताया कि कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर ट्यूबवेल कनेक्शन और बिजली समस्या के समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। खाद और बीज को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार खुद अच्छा बीज और खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गौशालाओं को अनुदान दिया जाता है, उसी तरह किसानों को भी गोवंश पालन पर अनुदान देने के प्रयास किए जाएंगे। छोटे किसानों के लिए बैल योजना शुरू की गई है, ताकि जुताई में उन्हें परेशानी न हो। पानी, किसान भवन और भविष्य की योजनाएं मातृकुंडिया बांध का पानी चित्तौड़गढ़ जिले के किसानों तक पहुंचाने की मांग पर आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय में सरकार स्तर पर बात की जाएगी। उन्होंने बताया कि किसान भवन को अब किसानों के उपयोग में लाया जाएगा। साथ ही यूरिया की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राजस्थान में खुद की फैक्ट्री लगाने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि किसानों को लाइन में न लगना पड़े। कार्यक्रम के अंत में आयोग अध्यक्ष ने किसानों को भरोसा दिलाया कि पानी, बिजली, खाद, बीज, बीमा और मुआवजे से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा।
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