होली का मौसम है। सीएम भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस के जवाब में जनता पर राहत की बौछारें कीं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में युवाओं के लिए सवा लाख नौकरियां और पंचायतों के विकास के लिए 9200 करोड़ रुपए।
होली के बाद पंचायत चुनाव का रंग चढ़ेगा। ऐसे में सीएम ने अपनी घोषणाओं में सामाजिक पेंशन बढ़ाई। किसान, आदिवासियों और श्रमिकों का भी ध्यान रखा। इस दौरान सीएम ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर भी जमकर सियासी गुलाल उड़ाया।
सीएम भजनलाल के जवाब से पहले जूली ने उदयपुर फाइल्स, सरकार में भर्तियों की जांच करवाने जैसी पिचकारियां छोड़ीं। ऐसे में सीएम भजनलाल ने भी पिछली सरकार के सियासी संकट, नेताओं की आपसी खींचतान के दौरान होटलों में रहने जैसी दुखती नब्ज को बार-बार छुआ।
सीएम ने अपने जवाब से कई तरह के संदेश दिए। इस संदेशों को कुछ सवालों से समझ सकते हैं…
सीएम भजनलाल ने होली से पहले जनता से जुड़ी कई घोषणाएं की।
सवाल : क्या बजट से ज्यादा अपने जवाब में सीएम ने लोकलुभावनी घोषणाएं की है?
जवाब : राज्य सरकार ने 11 फरवरी को बजट 2026-27 पेश किया था। बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया। अर्थशास्त्रियों ने भी सराहा। युवाओं के लिए नौकरी जैसी घोषणाओं की कसर रह गई थी, उसकी भरपाई सीएम ने अपने जवाब में कर दी।
सीएम ने जवाब में युवा-गांव-गरीब के साथ कर्मचारी, जन प्रतिनिधि, उद्योग, इन्फ्रा सहित लगभग सभी वर्गों को साधा। 1 लाख पदों की जगह 1.25 लाख पदों पर भर्ती कैलेंडर जारी करने की घोषणा की। पंचायतों को 9200 करोड़, जीरामजी स्कीम में मजदूरों को हर सप्ताह पैसा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाने जैसे कई वादे किए।
कांग्रेस इस सरकार के बजट की तुलना पिछली सरकार के बजट से कर रही है। सीएम ने पूरी ताकत से अपने जवाब में विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे माहौल को तोड़ने का प्रयास किया।
सवाल : क्या विपक्ष सीएम को घेरने में सफल रहा?
जवाब : सीएम भजनलाल ने पूरी राजनीतिक परिपक्वता के साथ जवाब देना शुरू किया। अपने हाव-भाव और राजनीतिक तंजों से विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों के चुन-चुनकर जवाब दिए।
कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत का नाम लिए बगैर उन्हें घेरा। सदन में आने की नसीहत तक दे डाली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उन्हें सदन से बाहर बयानबाजी करना शोभा नहीं देता। वे सदन में आते हैं, लेकिन यहां नहीं बोलते और बाहर मीडिया के सामने बात करते हैं। वह वरिष्ठ हैं, लेकिन उन्हें तो आना ही अच्छा नहीं लगता।
इसी तरह पिछली सरकार में फील्ड में रहने के बजाय होटलों में रुकने, जूली और डोटासरा के बीच नेता प्रतिपक्ष बनने की होड़ जैसे मुद्दों को छेड़कर विपक्ष को घेरा।

विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।
सवाल : पावर बैलेंस के लिए भी अपने जवाब में प्रयास किए?
जवाब : सीएम ने संदेश दिया कि सत्ता में रहते हुए जन प्रतिनिधियों को साधना जरूरी है। उन्होंने सभी को साथ लेकर चलने का मैसेज दिया। अपने जवाब में सीएम ने विधायकों सहित अन्य जन प्रतिनिधियों का ध्यान रखा। सीएम के जवाब में राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद नजर आई। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर विधायकों के वेतन-भत्ते हर साल बढ़ाए जाने की घोषणा की।
सीएम ने कहा कि जिस तरह सरकारी कर्मचारियों के वेतन-भत्ते हर साल अपने आप बढ़ते हैं, उसी तर्ज पर विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ेंगे। अगले वित्त वर्ष से यह व्यवस्था लागू होगी। इससे पक्ष और विपक्ष सभी जन प्रतिनिधियों को साधने का प्रयास किया।
सवाल : क्या पंचायत-निकाय चुनाव में फायदे ढूंढने की कोशिश की गई?
जवाब : पंचायत चुनाव के लिए आने वाले कुछ दिनों बाद ही आचार संहिता लागू होने वाली है। इन चुनावों में ज्यादा से ज्यादा अपने बोर्ड, अध्यक्ष, प्रधान, प्रमुख बनाने का दबाव रहेगा। पंचायतों के विकास, किसान, श्रमिकों, सामाजिक पेंशन आदि पर विशेष फोकस किया गया है। सीएम ने अपनी घोषणाओं में स्थानीय स्तर से आई मांगों को प्राथमिकता दी, जिससे जमीनी फायदा मिल सके।
जाहिर है कि ये घोषणाएं पंचायत या निकाय चुनाव में जाने के लिए अच्छा ग्राउंड तैयार कर सकती हैं। हर साल 10 फीसदी वेतन बढ़ाने की घोषणा के दायरे में पंच-सरपंच, पार्षद, अध्यक्ष, प्रधान, प्रमुख, मेयर, विधायक सहित सभी जन प्रतिनिधि भी शामिल हो गए।

सवाल : तीन शहरों के नाम बदलने के पीछे क्या सोच है?
जवाब : केंद्र सरकार हो या राज्यों की बीजेपी सरकार। शहरों का नाम बदलना उनके एजेंडे में शामिल है। ऐसा ही राजस्थान में भी सीएम भजनलाल ने किया। उन्होंने तीन शहरों के नाम बदले। बीजेपी का तर्क है कि आक्रांताओं ने या अन्य कारणों से पहले जो नाम बदले गए, उन्हें वापस ठीक कर रहे हैं। सीएम ने माउंटआबू का नाम आबूराज, जहाजपुर का नाम यज्ञपुर, कामां का नाम कामवन करने का ऐलान किया।
शहरों के नाम बदलकर सीएम भजनलाल ने अपने जवाब में वोट बैंक की राजनीति को भी साधा। शहरों के नाम बदलने और हिन्दूवादी राजनीति का संदेश भी देने का प्रयास किया। अपने जवाब से साफ मैसेज किया कि वे पार्टी के एजेंडे से टस से मस नहीं होंगे।

आरोपों के जवाब दिए
कांग्रेस ने विधानसभा में और विधानसभा से बाहर बीजेपी पर जो आरोप लगाए थे, उनका जवाब सीएम भजनलाल ने दिया।
- यमुना का पानी : शेखावाटी को यमुना के पानी से दूर रखने के आरोपों पर कहा कि हम यमुना का पानी शेखावाटी को जरूर पिलाएंगे, लेकिन आपने (कांग्रेस) क्या किया? आपके काम डबल जीरो, घोषणाएं कीं, बजट नहीं दिया और बजट दिया, तो खर्च नहीं किया।
- मेडिकल कॉलेज : मेडिकल कॉलेजों के नाम पर जमीनों की बंदरबांट का मुद्दा भी उठाया और कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए कैसा राजस्थान छोड़कर जाना चाह रहे हैं? क्या काकाजी का राज था जो निजी मेडिकल कॉलेजों को इतनी जमीन दी गई? पिछली सरकार उद्योगपति जितनी जमीन चाहते थे, सरकार उससे ज्यादा जमीन दे रही थी। लेकिन हमारी सरकार जितनी जरूरत होगी, उतना ही आवंटन करेगी।
- वित्तीय घाटा : सीएम भजनलाल ने कहा- हमारा बजट पिछली सरकार के आखिरी बजट से 41% ज्यादा है। हमारी सरकार ने वित्तीय घाटा 3.6 तक सीमित रखा है। पिछली सरकार में राजकोषीय घाटा औसत 4.25 फीसदी था। इस बार तीन साल में 3.9 से भी कम राजकोषीय घाटा रहा है। प्रति व्यक्ति आय में 21 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए राजस्थान मजबूत ग्रोथ इंजन बना है। हम रहें या न रहें यह राष्ट्र रहना चाहिए।
- उदयपुर फाइल्स और परीक्षाओं की जांच पर चुप्पी : राजनीति का अच्छा खासा अनुभव रखने वाले राजनेता अकसर कहते हैं कि हर आरोप का जवाब देना जरूरी नहीं। सीएम भजनलाल ने कुछ मुद्दों को नजर अंदाज किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरने के लिए उदयपुर फाइल्स का जिक्र किया। बीजेपी सरकार की भर्तियों की जांच करने की मांग उठाई। सीएम उदयपुर मामले का जिक्र करने से बचे, लेकिन भर्तियों को लेकर पिछली सरकार पर जमकर आरोप जड़े।
सदन का माहौल हल्का रखने के प्रयास भी
सीएम भजनलाल ने जवाब के दौरान माहौल को हल्का रखने का प्रयास भी किया। उन्होंने पेंशन योजनाओं के बहाने वरिष्ठ विधायक हरि मोहन शर्मा, शांति धारीवाल, राजेंद्र पारीक के नाम लिए और कहा मैं इनके बारे में नहीं सोचूंगा तो कौन सोचेगा। उनमें मंझे हुए राजनेता की झलक दिखाई दी।


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विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए सीएम भजनलाल शर्मा ने कई बड़ी घोषणाएं की। सीएम ने सरकारी विभागों में 1 लाख की जगह 1.25 लाख पदों पर भर्ती का कैलेंडर जारी करने की घोषणा की। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन 125 रुपए बढ़ाकर 1425 रुपए प्रतिमाह करने की घोषणा की। (पूरी खबर पढ़ें)
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