kanker Gram Sabha PESA Act News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बोर्डों को असंवैधानिक नहीं माना था. कहा था कि ये एहतियाती उपाय हैं, जो आदिवासी संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए लगाए गए हैं. इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.
मामला कांकेर जिले के आठ गांवों (कुडाल, परवी, जुनवानी, घोटा, घोटिया, हवेचुर, मुसुरपुट्टा और सुलांगी) से जुड़ा है. इन ग्राम पंचायतों ने गांव की सीमा पर बोर्ड लगाए थे, जिनमें लिखा था कि गांव पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, पेसा लागू है और ग्राम सभा अपनी परंपरा, संस्कृति, जनजातीय पहचान की रक्षा कर सकती है. बोर्डों में ईसाई पास्टर्स और अन्य गांवों से आए धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी, ताकि प्रलोभन या धोखे से जबरन धर्मांतरण न हो सके.
हाईकोर्ट ने असंवैधानिक नहीं माना
याचिकाकर्ताओं (दिग्बल टांडी समेत) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 28 अक्टूबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने बोर्डों को असंवैधानिक नहीं माना और कहा कि ये एहतियाती उपाय हैं, जो आदिवासी संस्कृति और विरासत की रक्षा के लिए लगाए गए. याचिकाकर्ता सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी.
फैसले का स्वागत
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे पेसा नियमों के तहत वैधानिक प्राधिकारी (ग्राम सभा/कलेक्टर) के पास जाएं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य की ओर से कहा कि याचिका में नई बातें जोड़ी जा रही हैं. छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “पेसा और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी संस्कृति बचाने का पूरा अधिकार है. हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर से ग्राम सभाओं की जीत हुई है.”
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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