ये है योजना का लाभ
समाज कल्याण विभाग के उप संचालक अजय गेदाम ने बताया कि इस योजना का मकसद सिर्फ साधन देना नहीं, बल्कि दिव्यांगों को सम्मान के साथ चलने – फिरने की सुविधा देना है. उन्होंने बताया कि ट्राइसाइकिल दो तरह की होती है. जिन दिव्यांगजनों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत है, उन्हें सामान्य ट्राइसाइकिल दी जाती है. वहीं जिनकी दिव्यांगता 80 प्रतिशत है, उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी जाती है. खास बात यह है कि यदि 70 प्रतिशत दिव्यांगता वाला कोई व्यक्ति रोजगार करने की इच्छा रखता है, तो उसे भी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल का लाभ मिल सकता है.
स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले बच्चों को बड़ी राहत
पढ़ाई कर रहे दिव्यांग बच्चों को लेकर भी शासन ने संवेदनशील निर्णय लिया है. उप संचालक अजय गेदाम के अनुसार, यदि 60 प्रतिशत दिव्यांगता वाला बच्चा 11वीं या 12वीं कक्षा में अध्ययनरत है, तो उसे भी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी जा सकती है. इससे दूर-दराज़ के गांवों से स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले बच्चों को बड़ी राहत मिल रही है और उनकी पढ़ाई बीच में छूटने से बच रही है.
मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की खूबियों की बात करें तो यह एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 20 से 25 किलोमीटर तक चल सकती है. इसे चार्ज होने में करीब 4 घंटे का समय लगता है, जिससे गांवों और कस्बों में रहने वाले दिव्यांगों के लिए यह काफी उपयोगी साबित हो रही है. कई लाभार्थी अब बाजार, दफ्तर और प्रशिक्षण केंद्र तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं.
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान रखी गई है. दिव्यांगजन अपने नजदीकी जनपद पंचायत कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं. वहां से आवेदन समाज कल्याण विभाग को भेजा जाता है. आवेदन के साथ दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआई कार्ड, आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र और फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज लगते हैं. सभी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पात्रता अनुसार ट्राइसाइकिल प्रदान की जाती है.
सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता. स्थानीय स्तर पर यह योजना दिव्यांगजनों के लिए सहारा बन रही है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है.